2 हादसे, वकील सुशील आर्य ने सड़क सुरक्षा को बनाया जीवन का लक्ष्य, 119 हादसों में मौके पर जाकर 89 लोगों की बचाई जान

Edited By Manisha rana, Updated: 12 Feb, 2026 03:38 PM

advocate sushil arya made road safety his life goal

सड़क हादसे कुछ पलों में ज़िंदगी बदल देने वाली घटनाएँ। भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो हादसे को अपनी कमज़ोरी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मिशन बना लेते हैं।

यमुनानगर (परवेज खान) : सड़क हादसे कुछ पलों में ज़िंदगी बदल देने वाली घटनाएँ। भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो हादसे को अपनी कमज़ोरी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मिशन बना लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है एडवोकेट सुशील आर्य की। 3 दिसंबर 2001 को पंजाब के डेराबस्सी में सुशील आर्य का पहला गंभीर सड़क हादसा हुआ। ज़िंदगी तो बच गई, लेकिन यह हादसा उनके भीतर एक गहरी छाप छोड़ गया। इसके बाद 7 अप्रैल 2005 को, पंजाब के लालडू में एक और भयानक सड़क दुर्घटना। इस बार असर और भी गहरा था। इस हादसे में सुशील आर्य की याददाश्त तक चली गई, लेकिन यहीं से एक नई शुरुआत हुई। एक ऐसा संकल्प, जिसने हज़ारों ज़िंदगियाँ बचाईं। 

एडवोकेट सुशील आर्य ने सड़क सुरक्षा को केवल काग़ज़ों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम शुरू किया। 119 सड़क हादसों में वे स्वयं मौके पर पहुँचे और 89 लोगों की जान बचाई। पूरे हरियाणा में यात्रा कर उन्होंने 1170 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए। वह स्थान जहाँ हादसों की आशंका सबसे अधिक थी। 25 अक्टूबर 2009 को सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च करने में सुशील आर्य की भूमिका निर्णायक रही।

फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम, अंबाला और यमुनानगर इन सभी ज़िलों की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया गया और सड़क हादसों के वैज्ञानिक आंकड़े तैयार किए गए। 14 दिसंबर 2014 को स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल का गठन हुआ। यही नहीं, सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी जेब से 500 रुपए की इनाम योजना शुरू की गई। सुशील आर्य के समर्पण को देखकर हरियाणा सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया। साल 2019 में सुशील आर्य ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की। परिणामस्वरूप पूरे देश में सड़क हादसों में मदद करने वालों के लिए इनाम राशि 5000 रुपए की गई जो आज बढ़कर 25,000 तक पहुँच चुकी है। अपने असाधारण योगदान के लिए सुशील आर्य को कई बार राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। 

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