Edited By Isha, Updated: 11 Feb, 2026 02:24 PM
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण को गति देने के लिए बड़ा खाका तैयार किया है। इस योजना के तहत राज्य के पांच प्रमुख जोनों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहत
चंडीगढ़: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण को गति देने के लिए बड़ा खाका तैयार किया है। इस योजना के तहत राज्य के पांच प्रमुख जोनों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार और पंचकूला—के अंतर्गत आने वाले 52 शहरों और कस्बों में 500 से अधिक नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए करीब 1.46 लाख एकड़ भूमि अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है।
एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे ने सभी जोन प्रशासकों और संपदा अधिकारियों को पत्र जारी कर आगामी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जहां संबंधित क्षेत्रों की राजस्व जानकारी, खसरा संख्या और भूमि का विस्तृत विवरण अपलोड किया जाएगा।
कई नए शहरों में भी बनेगा सेक्टर नेटवर्क
गुरुग्राम जोन में गुरुग्राम, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, सोहना, पटौदी, फर्रुखनगर और गोलपहली सहित सात शहर-कस्बों को योजना में शामिल किया गया है। फरीदाबाद जोन के तहत फरीदाबाद, नूंह, तावडू और होडल में नए सेक्टर विकसित होंगे।
रोहतक जोन में सबसे अधिक 14 शहरों
रोहतक, सांपला, कलानौर, सोनीपत, पानीपत, इसराना, खरखौदा, गन्नौर, गोहाना, झज्जर, बहादुरगढ़, आरोग्यधाम बाढ़सा और बेरी—में सेक्टर बसाने की योजना है। हिसार जोन में हिसार, हांसी, अग्रोहा, नारनौंद, उकलाना, बरवाला, जींद, नरवाना, उचाना, फतेहाबाद, टोहाना और भूना सहित 13 शहर-कस्बे शामिल किए गए हैं। वहीं पंचकूला जोन में पिंजौर-कालका, पंचकूला एक्सटेंशन (अलीपुर), रायपुररानी, यमुनानगर-जगाधरी, शाहाबाद, कैथल, करनाल, असंध, इंद्री, नीलोखेड़ी, कुरुक्षेत्र, पिहोवा और लाड़वा जैसे 14 शहर-कस्बों में नए सेक्टर विकसित किए जाएंगे।
चार श्रेणियों में होगा भूमि उपयोग
प्रस्ताव के अनुसार कुल 1,46,707.921 एकड़ भूमि को चार श्रेणियों में विकसित किया जाएगा। इसमें रिहायशी सेक्टरों के लिए 1,02,281.824 एकड़, व्यावसायिक उपयोग के लिए 11,553.725 एकड़, पब्लिक व सेमी-पब्लिक उपयोग के लिए 4,773.303 एकड़ तथा मिश्रित उपयोग के लिए 28,099.069 एकड़ भूमि शामिल है।
एचएसवीपी मुख्यालय स्तर पर जोनवार प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। योजना के अमल में आने से शहरों के आसपास नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इसके साथ ही आम लोगों को रियायती दरों पर आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट उपलब्ध होने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।