Edited By Isha, Updated: 20 Oct, 2026 08:28 AM

दिन के वक्त सचिवालय में ओएसडी के निजी सहायक (PA) की बड़ी जिम्मेदारी संभालना और रात ढलते ही पूरी निष्ठा के साथ प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित हो जाना—यह प्रेरणादायक कहानी है सुशील गर्वाण की। रामलीला और सनातन
हरियाणा डेस्क: दिन के वक्त सचिवालय में ओएसडी के निजी सहायक (PA) की बड़ी जिम्मेदारी संभालना और रात ढलते ही पूरी निष्ठा के साथ प्रभु श्रीराम की सेवा में समर्पित हो जाना—यह प्रेरणादायक कहानी है सुशील गर्वाण की। रामलीला और सनातन संस्कृति के प्रति अटूट प्रेम का ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहा है हरियाणा का गर्वाण परिवार, जिसकी रामलीला के प्रति श्रद्धा और समर्पण की चर्चा हर तरफ हो रही है।

वर्ष 2000 से निरंतर दे रहे हैं सेवा
सुशील गर्वाण साल 2000 से लगातार रामलीला में अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। इस बार वे मंच पर 'श्रवण कुमार' की बेहद भावुक भूमिका निभाकर दर्शकों का मन मोह रहे हैं। इससे पहले वे रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अनुज 'लक्ष्मण' की भूमिका भी बखूबी निभा चुके हैं। अभिनय के अलावा इस वर्ष उन्होंने ताड़िका, मंथरा और मामा मारीच जैसे चुनौतीपूर्ण पात्रों का मंचन कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। वे मंचन के साथ-साथ एक कर्मठ आयोजन कार्यकर्ता के रूप में भी लगातार योगदान दे रहे हैं।

संस्कारों और परंपरा की मिसाल है 'गर्वाण परिवार'
सुशील गर्वाण का पूरा परिवार पीढ़ियों से प्रभु श्रीराम की सेवा में जुटा हुआ है। उनके पिता कुंवर लाल गर्वाण रामलीला के वरिष्ठ उपप्रधान के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके बड़े भाई सुनील गर्वाण पहले ही रामलीला में मुख्य 'प्रभु श्रीराम' की भूमिका निभा चुके हैं।
गर्वाण परिवार की यह परंपरा केवल अभिनय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कारों, श्रद्धा और अनुशासन की एक जीवित मिसाल है। विगत कई दशकों से यह परिवार रामलीला के माध्यम से भारतीय संस्कृति की महान परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।