Karnal: अनुशासन के नाम पर गुरुकुल में 5 वर्षीय मासूम की बर्बर पिटाई, हालत गंभीर

Edited By Isha, Updated: 29 Apr, 2026 07:46 AM

5 year old innocent child brutally beaten at gurukul in the name of discipline

करनाल स्थित आर्य गुरुकुल कुटिया नलवी खुर्द के नाम से गुरुकुल में एक 5 वर्षीय बच्चे साथ बर्बरता से मारपीट व टार्चर करने का मामला सामने आया है। 5 वर्षीय नाबालिक के शरीर पर डंडों से मारपीट के निशान भी है।

गन्नौर(कपिल): हरियाणा के करनाल जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ नलवी खुर्द स्थित आर्य गुरुकुल कुटिया में एक महज 5 साल के बच्चे को अनुशासन सिखाने के नाम पर इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बच्चे के शरीर पर डंडों के गहरे निशान और सूजन देखकर परिजनों का कलेजा कांप उठा।

पीड़ित बच्चे के पिता श्रवण ने बताया कि उन्होंने बड़े चाव और सुनहरे भविष्य की उम्मीद के साथ 21 अप्रैल को अपने बेटे का दाखिला इस गुरुकुल में कराया था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मात्र एक हफ्ते के भीतर ही उनके बच्चे को इस यातना से गुजरना पड़ेगा। जब 27 अप्रैल को परिजन बच्चे से मिलने गुरुकुल पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए।

शरीर पर नीले निशान और हाथ-पैरों में सूजन
परिजनों के अनुसार, जब वे गुरुकुल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बच्चे के साथ मारपीट की जा रही थी। बच्चे के दोनों हाथों और पैरों पर गंभीर सूजन थी और पूरे पीठ व शरीर पर डंडों की पिटाई के नीले निशान पड़े हुए थे। जब परिजनों ने शिक्षक और संचालक से इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय इसे 'अनुशासन' का हिस्सा बताकर बात को टालने की कोशिश की। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि गुरुकुल संचालक ने बच्चे को डराया-धमकाया ताकि वह घर वालों को कुछ न बता सके।

मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया मासूम
बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे तुरंत वहां से निकाल कर घर ले आए और स्थानीय सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की नाजुक स्थिति और अंदरूनी चोटों की आशंका को देखते हुए उसे खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है।

पुलिस कार्रवाई और परिजनों का रोष
इस घटना से गुस्साए परिजनों ने सोनीपत के गन्नौर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों की मांग है कि शिक्षा के मंदिर को प्रताड़ना केंद्र बनाने वाले ऐसे संचालक और शिक्षकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाए ताकि किसी और मासूम के साथ ऐसा न हो।

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