एक ही फंड, कई अवसर, यही है फ्लेक्सी कैप की खासियत : देविप्रसाद नायर

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 27 Apr, 2026 07:25 PM

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इक्विटी निवेश की दुनिया में जहां हर श्रेणी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है, वहीं फ्लेक्सी कैप फंड्स की असली ताकत उनके लचीले स्वभाव में है। SEBI भी लगातार इस बात पर जोर देता रहा है

गुड़गांव ब्यूरो: इक्विटी निवेश की दुनिया में जहां हर श्रेणी अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है, वहीं फ्लेक्सी कैप फंड्स की असली ताकत उनके लचीले स्वभाव में है। SEBI भी लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि हर फंड अपने नाम और उद्देश्य के अनुरूप काम करे। अगर फ्लेक्सी कैप का मूल विचार बड़े, मिड और स्मॉल कैप में परिस्थितियों के अनुसार निवेश करना है, तो इसे किसी एक सेगमेंट तक सीमित नहीं होना चाहिए।

 

 *एक अच्छा फ्लेक्सी कैप क्यों काफी होता है* 

देविप्रसाद नायर, हेड ऑफ बिजनेस, हेलिओस इंडिया ने कहा कि कई निवेशकों के लिए एक मजबूत फ्लेक्सी कैप फंड ही उनके इक्विटी पोर्टफोलियो की आधारशिला बन जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह बाजार के बदलते चक्रों के साथ खुद को ढाल सकता है। निवेशक को अलग अलग कैटेगरी में बार बार बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि फंड स्वयं यह काम करता है। लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण है फंड मैनेजमेंट की गुणवत्ता। सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि फंड कैसे निर्णय ले रहा है, कब जोखिम कम कर रहा है, कब अवसरों को पहचान रहा है और बदलते वैल्यूएशन के अनुसार कैसे अपनी रणनीति बदल रहा है।

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     *निवेशक कहां चूक जाते हैं* 

    अक्सर निवेशकों के पोर्टफोलियो में पहले से ही बड़े कैप का काफी हिस्सा होता है, चाहे वह डायरेक्ट इक्विटी हो, इंडेक्स फंड्स या एनपीएस के जरिए। अगर फ्लेक्सी कैप फंड भी उसी दिशा में 65 से 70 प्रतिशत निवेश रखता है, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है और वह एक सामान्य बड़े कैप फंड जैसा दिखने लगता है। यही कारण है कि फ्लेक्सी कैप कैटेगरी की जरूरत सामने आई। जहां मल्टी कैप फंड्स के लिए तीनों सेगमेंट में न्यूनतम निवेश अनिवार्य किया गया, वहीं फ्लेक्सी कैप को पूरी स्वतंत्रता दी गई ताकि फंड मैनेजर बाजार के अनुसार निर्णय ले सके।

     

     *जब लचीलापन असली काम करता है* 

    बाजार कभी एक दिशा में नहीं चलता। वैल्यूएशन बदलते हैं, सेक्टर बदलते हैं और निवेश का प्रवाह भी समय के साथ बदलता है। ऐसे में एक सक्रिय फ्लेक्सी कैप फंड का काम है समय के साथ अपनी रणनीति बदलना। जब मिड और स्मॉल कैप आकर्षक दिखते हैं तब वहां निवेश बढ़ाना और जब जोखिम बढ़ता है तब बड़े कैप की ओर झुकाव लेना, यही इसकी असली भूमिका है। यह अस्थिरता नहीं बल्कि समझदारी है। उदाहरण के तौर पर, जब 2024 की शुरुआत में मिड कैप वैल्यूएशन काफी ऊंचे हो गए थे, तब बड़े कैप में निवेश बढ़ाना एक संतुलित निर्णय था। बाद में परिस्थितियां बदलीं तो आवंटन में बदलाव भी जरूरी हुआ। इससे साफ होता है कि बाजार के साथ चलने की क्षमता ही सबसे बड़ी ताकत है।

     

     *मिड और स्मॉल कैप में अवसर क्यों अधिक हैं* 

    बड़े कैप स्थिरता देते हैं, लेकिन तेजी से बढ़ने वाले अवसर अक्सर मिड और स्मॉल कैप में मिलते हैं। भारत में यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और यहां कई ऐसे व्यवसाय उभर रहे हैं जिनमें दीर्घकालिक वृद्धि की क्षमता है।

     

     निवेशक का नजरिया क्या होना चाहिए*

    सही सवाल यह नहीं है कि फ्लेक्सी कैप फंड कितनी बार अपना आवंटन बदलता है। बाजार स्वयं चक्रीय है और स्थिर पोर्टफोलियो अवसरों से चूक सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये बदलाव एक स्पष्ट प्रक्रिया, अनुशासन और दीर्घकालिक सोच पर आधारित हैं।

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