वेयरहाउस सुरक्षा पर भारी लापरवाही: बीमा क्यों नहीं बन रहा प्राथमिकता?

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 21 Feb, 2026 07:06 PM

gross negligence on warehouse safety why is insurance not a priority

वेयरहाउस में आग लगने का जोखिम। चिंताजनक बात यह है कि इतना बड़ा जोखिम होने के बावजूद वेयरहाउस फायर इंश्योरेंस आज भी भारत के सबसे बड़े “ब्लाइंड स्पॉट्स” में से एक बना हुआ है।

गुड़गांव ब्यूरो : भारत में ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग और तेज़ी से फैलते सप्लाई-चेन नेटवर्क के साथ वेयरहाउसिंग सेक्टर अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। छोटे शहरों से लेकर बड़े औद्योगिक हब तक, हर जगह विशाल गोदाम खड़े हो रहे हैं। लेकिन इस तेज़ विकास के साथ एक गंभीर खतरा भी चुपचाप बढ़ रहा है वेयरहाउस में आग लगने का जोखिम। चिंताजनक बात यह है कि इतना बड़ा जोखिम होने के बावजूद वेयरहाउस फायर इंश्योरेंस आज भी भारत के सबसे बड़े “ब्लाइंड स्पॉट्स” में से एक बना हुआ है। अक्सर वेयरहाउस में आग लगने की घटनाओं को एक साधारण दुर्घटना मानकर टाल दिया जाता है, जबकि हकीकत में इनमें से कई घटनाएं कमजोर सुरक्षा व्यवस्था, लापरवाह संचालन और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम होती हैं। ज्वलनशील सामान, प्लास्टिक पैकेजिंग, केमिकल्स, फैब्रिक, कागज़ और भारी मात्रा में रखा स्टॉक ये सभी आग के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। दूसरी ओर अस्थायी इलेक्ट्रिकल फिटिंग, ओवरलोडिंग, खराब वायरिंग और फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी जैसी समस्याएं कई गोदामों में आम हैं।

 

इस जोखिम का सबसे गहरा असर छोटे और मध्यम कारोबारों (SMEs) पर पड़ता है। एक आग की घटना सिर्फ स्टॉक को नहीं जलाती, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को ठप कर देती है। डिलीवरी रुक जाती है, क्लाइंट्स का भरोसा टूटता है, पेनल्टी लगती है और कई बार कारोबार को दोबारा खड़ा करना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासकर त्योहारों या पीक सीजन के दौरान लगी आग का मतलब होता है साल भर की कमाई का एक झटके में खत्म हो जाना। समस्या का दूसरा पहलू यह है कि कई वेयरहाउस या तो अंडर-इंश्योर्ड हैं या पूरी तरह बिना बीमा के संचालित हो रहे हैं। बहुत से व्यवसाय मालिक बीमा को अतिरिक्त खर्च समझते हैं, जबकि सच यह है कि किसी बड़े नुकसान के बाद कारोबार को संभालने के लिए यही सबसे अहम वित्तीय सुरक्षा कवच साबित होता है। कई बार पॉलिसी होने के बावजूद गलत वैल्यू डिक्लेरेशन, स्टॉक अपडेट न होना या कमजोर फायर सेफ्टी कंप्लायंस के कारण क्लेम में भी दिक्कतें आती हैं।

 

इस चुनौती का समाधान केवल बीमा खरीद लेना नहीं है, बल्कि वेयरहाउस को पूरी तरह “रिस्क-रेडी” बनाना है। नियमित फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिकल जांच, स्प्रिंकलर सिस्टम, पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और वैज्ञानिक स्टोरेज प्रैक्टिस जैसे कदम अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। साथ ही व्यवसायों को अपनी बीमा पॉलिसी की शर्तों को समझते हुए सही मूल्यांकन पर बीमा करवाना और समय-समय पर उसे अपडेट करना भी उतना ही जरूरी है। अमिताभ दीवान, हेड - लार्ज रिस्क, पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेस ने कहा  वेयरहाउसिंग भारत की आर्थिक प्रगति की मजबूत रीढ़ बनती जा रही है। लेकिन अगर आग का खतरा और बीमा की अनदेखी यूं ही जारी रही, तो यही विकास कई कारोबारों के लिए सबसे बड़ी कमजोरी भी साबित हो सकता है। अब समय है कि सुरक्षा और बीमा—दोनों को लागत नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखा जाए।

 

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!