Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 23 Jan, 2026 07:17 PM
यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है, यह एक बातचीत है। एक ऐसी बातचीत, जो आज के समय में बेहद ज़रूरी है। ‘
गुड़गांव, ब्यूरो : 20 फरवरी को रिलीज़ होने जा रही फिल्म “अस्सी” को लेकर दर्शकों और इंडस्ट्री में खासा उत्सुकता बनी हुई है। अब तक फिल्म की पहचान केवल इसके नाम के ज़रिए ही कराई गई थी, बिना कलाकारों, निर्देशक या निर्माता की किसी जानकारी के। फिल्म का ट्रेलर Border 2 के साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया है। इस फिल्म को लेकर पंजाब केसरी ने ‘अस्सी’ के लेखक गौरव सोलंकी से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में गौरव ने फिल्म की सोच, उसके सामाजिक संदर्भ और आने वाले समय में सिनेमा की दिशा को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
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सवाल: ‘अस्सी’ को लेकर इतनी चुप्पी क्यों रखी गई?
गौरव सोलंकी ने कहा हम चाहते थे कि फिल्म की बातचीत नाम और कहानी से शुरू हो, चेहरों से नहीं। अस्सी कोई सामान्य टाइटल नहीं है बल्कि यह फिल्म की आत्मा है। यह एक ऐसा नंबर है, जिसकी अहमियत ट्रेलर से समझ में आने लगती है। जब दर्शक नाम पर रुकता है, सोचता है, तभी फिल्म अपना काम शुरू करती है।
फिल्म की कहानी किस तरह की है?
गौरव सोलंकी ने कहा यह एक तेज़ रफ्तार कोर्टरूम ड्रामा है, लेकिन सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं है। इसमें इन्वेस्टिगेशन, थ्रिल और सामाजिक सच्चाइयाँ साथ-साथ चलती हैं। यह आज के समाज और मौजूदा समय के लिए बेहद प्रासंगिक फिल्म है। यह एक अर्जेंट वॉच फिल्म है।
आपने कहा कि यह फिल्म खत्म होने के बाद शुरू होती है—इसका क्या मतलब है?
गौरव सोलंकी ने कहा अक्सर फिल्में क्लाइमेक्स पर खत्म हो जाती हैं, लेकिन अस्सी दर्शक के साथ चलती है। कहानी पर्दे पर खत्म होती है, लेकिन सवाल आपके भीतर शुरू होते हैं। यही इसकी सबसे अच्छी बात है कि इसकी कहानी फिल्म के साथ खत्म नहीं होती।
क्या यह फिल्म खास तौर पर युवाओं के लिए है?
गौरव सोलंकी ने कहा बिल्कुल। यह फिल्म विशेष रूप से युवाओं के लिए है। खासतौर पर Gen Z के लिए। आज की पीढ़ी सवाल पूछती है, सिस्टम को समझना चाहती है। मुझे लगता है कि उन्हें यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए।
: छोटे शहरों के कंटेंट क्रिएटर्स को आप किस नज़र से देखते हैं?
गौरव सोलंकी ने कहा मेरे हिसाब से आने वाले समय में कंटेंट क्रिएटर्स ही बॉलीवुड का भविष्य हैं। अब सिर्फ स्टार नहीं, कहानी मायने रखती है। छोटे शहरों से जो अनुभव आता है, जो कहानियां आती हैं, वह बहुत सच्ची और ज़मीनी होती हैं। अस्सी भी उसी ईमानदारी से निकली फिल्म है।
राजस्थान के एक छोटे से शहर से यहां तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा?
गौरव सोलंकी ने कहा यह सफर आसान नहीं रहा। छोटे शहर से निकलकर मुंबई जैसे शहर में खुद को साबित करना वक्त लेता है। शुरुआत में सबसे बड़ा संघर्ष यही होता है कि आप जो लिखते हैं, वह बने। जब मैं यहां आया था, तब यह साफ था कि मुझे सिर्फ फिल्में लिखनी हैं। रास्ते में संघर्ष भी रहा, आर्थिक चुनौतियां भी रहीं, लेकिन यह स्पष्टता थी कि यही करना है। आज अगर मेरी कहानी लोगों तक पहुंच रही है, तो यह उसी धैर्य और विश्वास का नतीजा है।
क्या ‘अस्सी’ कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की दिशा में एक संकेत है?
गौरव सोलंकी ने कहा मुझे लगता है, हां। इस फिल्म के बाद कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों का एक दौर और मज़बूत होगा। यह फिल्म सिर्फ देखने वाली नहीं, बल्कि दिखाने वाली फिल्म है, जो समाज को आईना दिखाती है।
दर्शकों को इस फिल्म से क्या उम्मीद रखनी चाहिए?
गौरव सोलंकी ने कहा छोटे शहरों के लोग इस फिल्म को ज़रूर देखें। हिस्सा बना लेती है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है, यह एक बातचीत है। एक ऐसी बातचीत, जो आज के समय में बेहद ज़रूरी है। ‘अस्सी’ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विचार है, जो सवाल उठाती है, सोचने पर मजबूर करती है और दर्शक को।