छत्रपति मर्डर केस पीड़ितों ने आरोपियों के लिए मांगी सजा-ए-मौत (VIDEO)

Edited By Shivam, Updated: 11 Jan, 2019 01:14 PM

सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में बुधवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है। 11 जनवरी को इस मामले में फैसला आ सकता है। इस मामले में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने न्याय की उम्मीद करते हुए आरोपियों के...

सिरसा(सतनाम सिंह):सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में बुधवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है। आज इस मामले में फैसला आ सकता है। इस मामले में रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने न्याय की उम्मीद करते हुए आरोपियों के खिलाफ फांसी की सजा की मांग की है, वहीं 16 साल पहले हुए रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में फैसला आने पर डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक और सजा का सामना कर पड़ सकता है।

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पंजाब केसरी से बात-चीत हुए अंशुल बताते हैं कि उनके पिता रामचंद्र छत्रपति ने वर्ष 2000 में पूरा सच नाम से एक न्यूज पेपर शुरू किया था, जिसमें उन्होंने हमेशा सच लिखा। अंशुल ने बताया कि मई 2002 में एक साध्वी का गुमनाम पत्र आया, जिसमें उसने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के कारनामे लिखे कि किस तरह से उनका यौन शोषण किया जा रहा है, जिसे उनके पिता ने अपने न्यूज पेपर में छापा और डेरा चीफ को एक्सपोज करने का काम किया।

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अंशुल ने बताया कि उसके बाद उनके पिता को धमिकयां मिलनी शुरू हो गई और 24 अक्टूबर 2002 को डेरे के लोगों ने उनके पिता को घर के बाहर बुलाकर उनपर गोलिया चलाई जिसे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दौरान हमलावरों को पुलिस मुलाजिमों ने पकड़ लिया और तभी खुलासा हुआ कि हमलावर डेरा के लोग हैं।

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अंशुल ने बताया कि उसके बाद 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति जिंदगी की लड़ाई हार गए। उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी और सीबीआई जांच की मांग के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। 

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नवंबर 2003 में हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफ आई आर दर्ज की और दिसंबर में इस केस की जांच शुरू हुई, हालांकि 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा की याचिका खारिज कर दी।

करीब 15 साल इस केस की सुनवाई सीबीआई अदालत में चली और अब दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत नतीजे के बेहद करीब हैं। 11 जनवरी को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। अंशुल ने आरोपियों के खिलाफ सजा-ए-मौत की मांग की है।

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