पंजाब सरकार ने जब पानी को रोका तो हरियाणा को भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड की याद आई: प्रो. सम्पत सिंह

Edited By Isha, Updated: 03 May, 2025 06:41 PM

when punjab government stopped the water

पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. सम्पत सिंह ने हरियाणा सरकार से कहा कि उन्होंने भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड से लम्बे समय से दूरी क्यों बनाई हुई है। प्रदेश के पानी के   मुख्य स्त्रोत सतलुज, व्यास और रावी नदी के पा

चंडीगढ ( चन्द्र शेखर धरणी ): पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. सम्पत सिंह ने हरियाणा सरकार से कहा कि उन्होंने भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड से लम्बे समय से दूरी क्यों बनाई हुई है। प्रदेश के पानी के   मुख्य स्त्रोत सतलुज, व्यास और रावी नदी के पानी की उनको कोई चिंता नहीं है। पंजाब सरकार ने जब इन नदियों के पानी को रोका तो भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड की याद आई।

उन्होंने कहा कि बीबीएमबी सतलुज, व्यास और रावी के पानी के समुचित बंटवारें, संचालन व प्रबंधन करने वाली संवैधानिक संस्था है। जिसमें हरियाणा सरकार अपने किसी प्रमुख वरिष्ठ मुख्य अभियन्ता सिविल की नियुक्ति करवाती रही है। परंतु पिछले कई वर्षो से हरियाणा सरकार की बेरूखी की वजह से न ही तो कोई सिंचाई विभाग का सदस्य नियुक्त किया गया और न ही सुंदर नगर में उपयुक्त व स्थाई प्रमुख अभियन्ता लगाया गया है। इसी तरफ भाखड़ा डैम सर्कल में पहले शुरू से हरियाणा प्रदेश का अधीक्षक अभियंता लगता रहा है परंतु अब थोडे़ दिन पहले पंजाब के अधीक्षक अभियन्ता की नियुक्ति की गई। इन परिस्थितियों में हरियाणा प्रदेश कैसे उम्मीद कर सकता है कि उसे उचित मात्रा में समय की आवश्यकतानुसार पानी मिलेगा। इसी वजह से पहली बार हरियाणा प्रदेश का पानी रोका गया है।

प्रो. सिंह ने सुझाव दिया की ब्यानबाजी की बजाये बिना समय खोये तुरंत प्रभाव से सुंदर नगर में सिंचाई विभाग के सक्रिय व वरिष्ठ सिविल मुख्य अभियन्ताओं में से तुरंत किसी को नियुक्ति दिलाई जाए। ताकि वो आगे चलकर बोर्ड का स्थाई सदस्य बन सके। भाखड़ा डैम सर्कल में भी सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता भूषण लाल कंबोज जिसको काबिलियत की वजह से चैयरमेन भी पंसद करते है की बिना देरी के नियुक्ति की जाए। इन तीनों नदियों के पानी में पंजाब और हरियाणा के साथ राजस्थान, दिल्ली व चण्डीगढ़ की भी हिस्सेदारी है इसलिए इन बाॅंधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पंजाब सरकार से लेकर केन्द्रीय बलों को दी जाएं।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के चक्रव्युह में फंसकर हरियाणा प्रदेश की सरकार उचित कदम उठाने की बजाये राजनीतिक बैठकें, हरियाणा विधानसभा का अधिवेशन बुलाने व सर्वोच्चय न्यायालय में जाने की बात कर रही है।
 

दो सप्ताह का समय बर्बाद हो चुका और आने वाले दो सप्ताह के बाद यानी 20 मई के बाद तो पंजाब सरकार उचित पानी देने की बात कर रही है। पीने का पानी न मिलने की वजह से लोगों में त्राही-त्राही मच रही है और यदि 15 मई तक पानी नहीं आया तो किसान नरमा और कपास की बिजाई से भी वंचित रह जाएगा। मुख्यमंत्री सभी प्रभावित क्षेत्रों के नेताओं को साथ लेकर तुरंत प्रधानमंत्री व विद्युत मंत्री से मिले और हमारे हक के पानी को तुरंत उपलब्ध करवायें।

 

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