"गब्बर" सख्त और "बाबा" बेहद नरम, ये दोनों क्वालिटी अनिल विज को बनाती हैं चर्चित और प्रभावशाली चेहरा

Edited By Isha, Updated: 28 Jul, 2026 10:03 AM

these two qualities make anil vij a prominent and influential figure

राजनीति में व्यक्ति की कार्यशैली, जनसमर्पित भावना और कुछ कर दिखाने की क्षमता ही उसे अलग पहचान दे सकती है। अगर बात हरियाणा की करें तो *अनिल विज* ऐसे ही नेताओं में से एक हैं। यहाँ वह गब्बर"

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी):  राजनीति में व्यक्ति की कार्यशैली, जनसमर्पित भावना और कुछ कर दिखाने की क्षमता ही उसे अलग पहचान दे सकती है। अगर बात हरियाणा की करें तो *अनिल विज* ऐसे ही नेताओं में से एक हैं। यहाँ वह गब्बर" की सख्ती और "बाबा" का अपनापन, दोनों के कारण आज भी लंबे समय से प्रदेश में सबसे चर्चित और प्रभावशाली चेहरों में शुमार हैं।
सात बार विधायक, तीन बार भाजपा सरकार में केबिनेट मंत्री और हमेशा सुर्खियों में रहने वाले विज को लोग प्यार से "गब्बर" और "बाबा" भी कहते हैं। निर्भीक, निष्पक्ष और बेबाक बोलने वाले विज की छवि कठोर प्रशासक की है, लेकिन दिल उनका कोमल है। जो भी उनके दरवाजे पहुंचा, उसने खाली हाथ वापसी नहीं की।

वर्तमान में वे ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग संभाल रहे हैं और तीनों में बड़े बदलाव के प्रयास कर रहे हैं। वहीं अंबाला कैंट का नक्शा उन्होंने विकास के प्रोजेक्ट्स से पूरी तरह बदल दिया है।

सात बार विधायक, तीन बार मंत्री: अनुभव की ताकत
अनिल विज हरियाणा विधानसभा में सातवीं बार पहुंचे हैं। 1990 से अंबाला कैंट का प्रतिनिधित्व कर रहे विज भाजपा की तीनों सरकारों में केबिनेट मंत्री रहे हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।  लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण उन्हें प्रशासन की बारीकियों की समझ है। वे फाइलों पर घंटों बैठकर काम करते हैं और विभाग में तुरंत निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व उन पर लगातार भरोसा जता रहा है।

तीन विभाग, तीन मिशन: ऊर्जा, परिवहन और श्रम में बदलाव
वर्तमान में अनिल विज के पास *ऊर्जा, परिवहन और श्रम* जैसे अहम विभाग हैं और तीनों में वे परिवर्तन लाने के लिए जुटे हैं।
ऊर्जा विभाग में उन्होंने बिजली चोरी रोकने और ट्रांसफार्मर जलने की समस्या को प्राथमिकता दी। स्मार्ट मीटर और ऑनलाइन शिकायत निवारण सिस्टम लागू कर उपभोक्ताओं को राहत दी।  परिवहन विभागमें रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए नई बसें, वॉल्वो सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग शुरू करवाई।   श्रम विभाग में मजदूरों के पंजीकरण, ई-श्रम कार्ड और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को तेज किया। उनका स्पष्ट निर्देश है - "आम आदमी को दफ्तर के चक्कर न लगवाएं, सेवा उसके घर तक जाए"।

अंबाला का बदला नक्शा: विकास के प्रोजेक्ट्स
अंबाला कैंट की सूरत बदलने का श्रेय काफी हद तक अनिल विज को जाता है। उन्होंने यहां दर्जनों प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतारकर पूरे शहर का नक्शा ही बदल दिया। सड़कों का चौड़ीकरण, अंडरपास, फ्लाईओवर, पार्कों का सौंदर्यीकरण और सीवरेज सिस्टम में सुधार उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां हैं। शहर में 24 घंटे पेयजल, स्मार्ट सिटी मिशन और स्वच्छता अभियान को भी गति मिली।

**दो ड्रीम प्रोजेक्ट: एयरपोर्ट और शहीदी स्मारक*
अंबाला के लिए विज दो राष्ट्रीय स्तर के ड्रीम प्रोजेक्ट लेकर आए हैं। अंबाला एयरपोर्ट बनकर तैयार है। इसके शुरू होने से उत्तर भारत का यह इलाका हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ जाएगा। व्यापार, पर्यटन और रोजगार को नई उड़ान मिलेगी।   दूसरा प्रोजेक्ट है *देश की आजादी की प्रथम चिंगारी का ऐतिहासिक स्मारक स्थल*। 1857 की क्रांति की शुरुआत अंबाला से हुई थी। उस गौरव को सहेजने के लिए बन रहा यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा।

"गब्बर" और "बाबा": नाम में छिपा व्यक्तित्व
लोगों ने अनिल विज को उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली के कारण "गब्बर" और "बाबा" जैसे नाम दिए हैं। "गब्बर" इसलिए क्योंकि वे भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त हैं। अधिकारियों की मीटिंग में उनकी एक झाड़ से काम सीधा हो जाता है। "बाबा" इसलिए क्योंकि वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। सुबह-सुबह उनके घर के बाहर लोगों की लंबी कतार लगती है। हर फरियादी को वे व्यक्तिगत रूप से सुनते हैं।

निर्भीक और निष्पक्ष: जो मन में वही जुबान पर
अनिल विज की सबसे बड़ी पहचान उनकी बेबाकी है। वे जो सोचते हैं वही बोलते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या विधानसभा, वे बिना लाग-लपेट के बात रखते हैं। कठोर व्यक्तित्व के कारण कई बार वे चर्चाओं में भी अपने सख्त निर्णयों को लेकर रहे, लेकिन समर्थक उन्हें "ईमानदार और निडर नेता" मानते हैं। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि को चापलूसी नहीं, सच बोलना चाहिए। इसी निडरता के कारण आम जनता उन्हें अपना मानती है।

कोमल हृदय: हर मददगार के लिए दरवाजा खुला
कठोर छवि के पीछे उनका कोमल हृदय छिपा है। अंबाला ही नहीं, पूरे प्रदेश से लोग अपनी समस्या लेकर उनके पास आते हैं। चाहे इलाज के लिए आर्थिक सहायता हो, नौकरी की सिफारिश हो या कानूनी मदद - विज हर संभव प्रयास करते हैं। उनके स्टाफ का कहना है कि "विज साहब रात 12 बजे भी फोन उठाकर अधिकारी को निर्देश दे देते हैं अगर कोई गरीब मदद मांग रहा हो"। यही कारण है कि लोग उन्हें भगवान जैसा मानते हैं।

अतीत के विभागों में क्रांतिकारी बदलाव
इससे पहले विज स्वास्थ्य मंत्री, खेल मंत्री, गृह मंत्री और लोकल बॉडी मंत्री भी रह चुके हैं। हर विभाग में उन्होंने क्रांतिकारी बदलाव किए।स्वास्थ्य मंत्री रहते उन्होंने सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की हाजिरी और सफाई व्यवस्था पर सख्ती की।  गृह मंत्री रहते कानून-व्यवस्था को चुस्त किया और अपराधियों पर नकेल कसी।  खेल मंत्रीरहते खिलाड़ियों को सुविधाएं और इनाम बढ़वाए।  लोकल बॉडी मंत्री रहते शहरों में विकास कार्यों को गति दी।

कोरोना योद्धा: बीमारी से लड़ते हुए भी मोर्चा संभाला
कोरोना काल में अनिल विज ने फ्रंटलाइन लीडर की भूमिका निभाई। स्वास्थ्य मंत्री रहते उन्होंने लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए *कोरोना की वैक्सीन का ट्रायल खुद पर करवाया*। वे देश के पहले मंत्री बने जिन्होंने सार्वजनिक रूप से टीका लगवाया।

दुर्भाग्य से वे खुद कोरोना पॉजिटिव हो गए और *अंबाला कैंट के सरकारी अस्पताल* में भर्ती हुए। लेकिन बीमारी से लड़ते हुए भी उन्होंने काम नहीं छोड़ा। जैसे ही थोड़ा चलने-फिरने लायक हुए, *ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर हरियाणा सचिवालय पहुंचे और मोर्चा संभाला। जब पूरा प्रदेश घरों में बंद था और कोई बाहर निकलने से डर रहा था, तब विज रोज सचिवालय आकर स्वास्थ्य विभाग की पूरी मॉनिटरिंग खुद करते रहे। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और टेस्टिंग की व्यवस्था वे हर रोज अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर दुरुस्त कराते थे। उनकी यह जुझारूपन और समर्पण कोरोना योद्धा के रूप में आज भी मिसाल है।

विकास, बेबाकी और जनसेवा का संगम
अनिल विज राजनीति के उस दुर्लभ मॉडल का नाम हैं जहां विकास, बेबाकी और जनसेवा तीनों एक साथ दिखते हैं। सात बार की विधायकी और तीन बार की मंत्रीशिप में उन्होंने साबित किया कि अगर नियत साफ हो तो सत्ता से समाज की सूरत बदली जा सकती है।

अंबाला का बदला हुआ चेहरा, ऊर्जा-परिवहन-श्रम में चल रहे सुधार और लोगों के दिलों में बनी जगह - यही उनकी असली पूंजी है। "गब्बर" की सख्ती और "बाबा" का अपनापन, दोनों के कारण अनिल विज आज भी हरियाणा की राजनीति में सबसे चर्चित और प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।


 

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