सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां, नियमों को ताक पर रख चल रहे हैं ईंट-भट्ठे

Edited By Vivek Rai, Updated: 04 Jul, 2022 03:26 PM

supreme court orders are being blown away brick kilns are still running

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ईंट-भट्ठों के संचालन पर एक जुलाई से पूरी तरह रोक लग चुकी है। इसके बावजूद तकनीकी के सहारे रेवाड़ी में कई भट्टा मालिकों ने इनका संचालन जारी रखा हुआ है। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए इन भट्ठों का संचालन...

रेवाड़ी(महेंद्र): सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ईंट-भट्ठों के संचालन पर एक जुलाई से पूरी तरह रोक लग चुकी है। इसके बावजूद तकनीकी के सहारे रेवाड़ी में कई भट्टा मालिकों ने इनका संचालन जारी रखा हुआ है। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए इन भट्ठों का संचालन रात-रात में किया जाता है। शाम को दिन ढलने के बाद ही भट्टों पर काम शुरू हो जाता है और सुबह दिन निकलने के साथ ही काम बंद कर दिया जाता है। इस समय रेवाड़ी जिले में 90 से अधिक ईट के भट्ठे हैं, जिनका पूरा नियंत्रण खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के हाथ में है।

30 जून तक ईंट-भट्ठों को बंद करने का था आदेश

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 प्रदूषण के मामले में जिला कंट्रोल बोर्ड और मिट्टी के मामले में खनन विभाग भी कार्रवाई करने में सक्षम है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भट्ठों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर अनुमति भी मांगी थी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से भट्टा मालिकों को निर्देश दिए गए थे कि भट्ठों का संचालन 30 जून के बाद पूरी तरह से बंद कर दिया जाए। जिला खाद्य आपूर्ति की ओर से निगरानी रखने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर को सौंपी गई है।

अधिकारियों पर भी भट्टा संचालकों के साथ सांठगांठ के लगाए आरोप

भट्ठे बंद करने की समय सीमा खत्म होने के बाद कुछ भट्ठों को बंद कर लेबर वापस भेज दिया गया है, जबकि कुछ लोग अभी भी नियमों को तांक पर रखकर भट्टों का संचालन कर रहे हैं। विभाग की तरफ सेल जिन इंस्पेक्टरों को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है, वे भी खानापूर्ति कर अपनी दिहाड़ी बना रहे हैं। घारुहेडा और बावल क्षेत्र में कई भट्टों से शाम ढलने के बाद धुआं उठना शुरू हो जाता है। रेवाड़ी के नारनौल रोड पर कुछ भट्ठों का संचालन चोरी से किया जा रहा है। अधिकारी जब तक यहां जांच करने के लिए पहुंचते हैं, तब तक इन्हें बंद कर दिया जाता है। परंतु भट्ठा मालिकों के साथ सांठगांठ के चलते बोर्ड के अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। भट्टा मालिक खुलेआम अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

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