Edited By Krishan Rana, Updated: 29 Jul, 2026 08:42 PM

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ की प्रेरणादायी पुस्तक 'श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति–गिव योर बेस्ट' का द्वितीय
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ की प्रेरणादायी पुस्तक 'श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति–गिव योर बेस्ट' का द्वितीय संस्करण प्रकाशित हो गया है। पुस्तक के नए संस्करण पर देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना आशीर्वचन देते हुए इसे केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि जीवन में उतारने योग्य कृति बताया है।
रामनाथ कोविंद ने अपने संदेश में लिखा कि यह पुस्तक व्यक्ति को श्रेष्ठ विचारों और श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि यह रचना सफलता के सूत्र देने के साथ-साथ जीवन के परम सत्य की ओर भी प्रेरित करती है। पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद होने से इसका दायरा गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों तक भी बढ़ेगा।
पुस्तक में ओमप्रकाश धनखड़ ने कर्म के दस स्तरों का उल्लेख करते हुए बताया है कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके कर्मों से होती है। उन्होंने सामान्य दिनचर्या से लेकर परिवार, समाज, राष्ट्र और अंततः बिना किसी अपेक्षा के लोककल्याण एवं परमार्थ तक की यात्रा को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बताया है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन के सर्वोच्च कर्म स्तर को पहचानकर उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
धनखड़ ने पुस्तक में रामायण और महाभारत के दो प्रसंगों के माध्यम से विचारों की अधोगामी और ऊर्ध्वगामी यात्राओं का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कैकेयी और मंथरा के प्रसंग को नकारात्मक संगति का उदाहरण बताते हुए कहा कि गलत विचार जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं, जबकि श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता उपदेश को सकारात्मक विचार और स्वधर्म की सर्वोच्च प्रेरणा बताया है। उनके अनुसार संगति ही व्यक्ति के विचारों और जीवन की दिशा तय करती है।
धनखड़ ने मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित रसयात्रा रेस्टोरेंट में वरिष्ठ प्रिंट मीडिया पत्रकारों के साथ पुस्तक पर चर्चा भी की। इस दौरान डॉ. संजय शर्मा और संजय आहूजा भी उपस्थित रहे। बुधवार सुबह ओमप्रकाश धनखड़ ने पुस्तक के द्वितीय संस्करण की प्रतियां हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण तथा राज्यपाल को भेंट कीं। इससे पहले उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी पुस्तक की प्रति समर्पित की।