Edited By Isha, Updated: 27 Aug, 2026 09:46 AM
हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। अवधि सीमित होने के बावजूद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्ष ने बेरोजगारी, हरियाणा कौशल रोजगार
चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। अवधि सीमित होने के बावजूद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्ष ने बेरोजगारी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन), कानून-व्यवस्था, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, कर्मचारियों की लंबित मांगों, नशे और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की है। वहीं भाजपा विधायक दल ने भी विपक्ष के संभावित हमलों का जवाब देने के लिए अपना होमवर्क पूरा कर लिया है।
मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक चली बैठक, रणनीति पर हुआ मंथन
सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सदन के भीतर उठने वाले प्रमुख मुद्दों, विपक्ष के संभावित सवालों और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाबों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद डिनर डिप्लोमेसी के जरिए भी विधायकों के साथ राजनीतिक और सदन की रणनीति पर मंथन हुआ।
सरकार की कोशिश रहेगी कि सीमित समय में अधिक से अधिक विधायी कार्य पूरे किए जाएं और विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर तथ्यात्मक जवाब देकर राजनीतिक बढ़त बनाए रखी जाए।
पहले दिन शोक प्रस्ताव, इसके बाद प्रश्नकाल
सत्र के पहले दिन सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होगी। शुरुआत में शोक प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। इसके बाद प्रश्नकाल होगा, जिसमें विधायक सरकार से विभिन्न विभागों से जुड़े सवाल पूछेंगे।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सदन की कार्यवाही के कार्यक्रम पर चर्चा के बाद सीमित अवधि में विधायी कामकाज पूरा करने की योजना बनाई गई है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन को पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
कांग्रेस के निशाने पर एचकेआरएन और बेरोजगारी
कांग्रेस ने मानसून सत्र के लिए रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी पहले से ही हरियाणा कौशल रोजगार निगम की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है। अब विधानसभा में भी एचकेआरएन के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों, रोजगार प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
कांग्रेस युवाओं में बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों की उपलब्धता और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सदन में प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। विपक्ष का प्रयास रहेगा कि रोजगार का मुद्दा सत्र के दौरान सबसे बड़ी राजनीतिक बहस का विषय बने।
कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का मुद्दा भी उठाएगी कांग्रेस
कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी गुजरात को दिए जाने के मुद्दे पर भी हरियाणा कांग्रेस विधानसभा में आवाज उठाने की तैयारी में है। पार्टी की मांग है कि हरियाणा को कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में को-ऑर्गेनाइजर स्टेट की भूमिका दी जाए।
कांग्रेस प्रदेश की खेल उपलब्धियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा के खिलाड़ियों के योगदान को आधार बनाकर यह मुद्दा उठाएगी। पार्टी का तर्क रहेगा कि खेल प्रतिभाओं और खेल ढांचे के लिहाज से हरियाणा को इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए।
इनेलो ने भी तैयार किया सवालों का पूरा खाका
इंडियन नेशनल लोकदल ने भी विधानसभा सत्र के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। इनेलो विधायक दल के नेता आदित्य देवीलाल की ओर से पांच तारांकित और दो अतारांकित प्रश्न लगाए गए हैं। वहीं विधायक अर्जुन चौटाला ने नौ तारांकित और एक अतारांकित प्रश्न लगाए हैं।
दोनों विधायकों की ओर से कुल 10 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी दिए गए हैं। इससे संकेत है कि इनेलो सदन में सरकार को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा।
बैंक घोटाले से लेकर भूजल संकट तक सरकार से जवाब मांगेगा इनेलो
आदित्य देवीलाल के ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में 550 करोड़ रुपये से अधिक के आईडीएफसी बैंक घोटाले का मुद्दा शामिल है। इसके अलावा हरियाणा कौशल रोजगार निगम में कथित अनियमितताओं, प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर और कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। प्रॉपर्टी टैक्स को कलेक्टर रेट के आधार पर चार्ज करने और एवैक्यूई प्रॉपर्टी कानून से जुड़े मामलों को भी सदन में उठाने की तैयारी है। कानून-व्यवस्था को लेकर भी इनेलो सरकार से जवाब मांगेगा।
नशा, शिक्षकों के खाली पद और स्कूल छोड़ रहे बच्चों पर अर्जुन चौटाला का फोकस
विधायक अर्जुन चौटाला की ओर से दिए गए ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में प्रदेश में बढ़ते नशे का मुद्दा प्रमुख है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों खाली पदों और एक लाख से अधिक बच्चों के स्कूल छोड़ने के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इन मुद्दों के जरिए शिक्षा व्यवस्था, युवाओं और नशे की समस्या को सदन की बहस के केंद्र में लाने की कोशिश करेगा।
तीन दिन के अंतराल के बाद फिर गरमाएगा सदन
पहले दिन की कार्यवाही के बाद विधानसभा की बैठक में अंतराल रहेगा। इसके बाद 31 अगस्त को सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी और एक सितंबर को विधायी कामकाज पूरा होने के बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाएगा।
कम अवधि के इस सत्र में सरकार के पास विधायी कामकाज के लिए सीमित समय है, लेकिन विपक्ष के पास मुद्दों की लंबी सूची है। ऐसे में विधानसभा का मानसून सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार के लिए जवाबदेही, विपक्ष के लिए मुद्दों को धार देने की चुनौती
इस बार सत्र का असली महत्व इसकी अवधि से अधिक सदन में होने वाली बहस से तय होगा। विपक्ष जहां बेरोजगारी, एचकेआरएन, कानून-व्यवस्था, नशा, शिक्षा और कर्मचारियों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार अपनी योजनाओं और उपलब्धियों के आधार पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की तैयारी में है।
सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीति स्पष्ट है। सरकार जहां सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाकर विधायी एजेंडा पूरा करना चाहेगी, वहीं विपक्ष सीमित समय में अधिक से अधिक जनसरोकार के मुद्दे उठाकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।