Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 08 Jan, 2026 08:11 PM

नगर निगम गुरुग्राम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स के माध्यम से राजस्व बढ़ाने को लेकर किए जा रहे सख्त प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। निगम की टैक्स ब्रांच द्वारा डिफॉल्टर प्रॉपर्टी मालिकों के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान के चलते चालू वित्त...
गुड़गांव, (ब्यूरो): नगर निगम गुरुग्राम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स के माध्यम से राजस्व बढ़ाने को लेकर किए जा रहे सख्त प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। निगम की टैक्स ब्रांच द्वारा डिफॉल्टर प्रॉपर्टी मालिकों के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान के चलते चालू वित्त वर्ष में अब तक 295 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी टैक्स राशि निगम के खजाने में जमा हो चुकी है। यह निगमायुक्त प्रदीप दहिया के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
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नगर निगम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 410 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। वहीं, नोटिस के बावजूद टैक्स का भुगतान न करने वाली 55 प्रॉपर्टीज को सील किया गया है। इन नोटिसों और सीलिंग की कार्रवाई के परिणामस्वरूप लगभग 30 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी टैक्स राशि की वसूली संभव हुई है। निगम अधिकारियों के अनुसार, राजस्व वसूली को और मजबूत करने के उद्देश्य से यह अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। प्रॉपर्टी टैक्स संग्रह को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए हाल ही में जोनल टैक्सेशन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में टैक्स वसूली बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर विशेष रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
इन बिंदुओं में सर्वम कॉल डेटा के माध्यम से प्राप्त लीड्स को भुगतान में परिवर्तित करना, डीएलएफ क्षेत्रों में टीसीपी द्वारा रिपोर्ट किए गए उल्लंघनों पर कार्रवाई, हाउसिंग डॉट कॉम एवं मैजिकब्रिक्स से प्राप्त पीजी से संबंधित डेटा का विश्लेषण, साल्ट स्टेज व हाउजर जैसे ऑनलाइन पीजी प्लेटफॉर्म की लिस्टिंग तथा निगम की विज्ञापन शाखा द्वारा साझा किए गए पीजी से जुड़े अवैध विज्ञापनों का डेटा शामिल है। इन सभी स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर नगर निगम गुरुग्राम ने अब पीजी प्रॉपर्टीज के माध्यम से की जा रही टैक्स चोरी पर कड़ा शिकंजा कसने का निर्णय लिया है। नगर निगम गुरुग्राम ने स्पष्ट किया है कि अब पीजी के रूप में उपयोग की जा रही प्रॉपर्टीज के मामलों में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व संबंधित प्रॉपर्टी मालिक पर होगा। डिफॉल्ट रूप से यह माना जाएगा कि संबंधित प्रॉपर्टी का उपयोग पीजी के रूप में आकलन अवधि की शुरुआत (जैसे 2010-11) या जिस वर्ष वह क्षेत्र नगर निगम की सीमा में शामिल हुआ, उसी समय से किया जा रहा है। हालांकि, यदि किसी प्रॉपर्टी मालिक के पास इससे अलग तथ्य सिद्ध करने के लिए वैध दस्तावेज या प्रमाण उपलब्ध हैं, तो वे नियमानुसार करेक्शन एप्लीकेशन या अपील दायर कर सकते हैं। निगम का उद्देश्य पारदर्शी व्यवस्था के तहत निष्पक्ष टैक्स निर्धारण एवं वसूली सुनिश्चित करना है।