हिसार रोडवेज कर्मचारियों का बड़ा फैसला, रात्रि ठहराव सेवाएं बंद; चक्का जाम की चेतावनी

Edited By Harman, Updated: 23 Jun, 2026 06:39 PM

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हिसार रोडवेज डिपो में कर्मचारियों का धरना आज 40वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने महाप्रबंधक (GM) पर लंबित समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाते हुए हिसार और हांसी सब डिपो की बसों को रात्रि ठहराव पर भेजने से इनकार कर दिया है।

हिसार ( विनोद सैनी) : हिसार रोडवेज डिपो में कर्मचारियों का धरना आज 40वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों ने महाप्रबंधक (GM) पर लंबित समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाते हुए हिसार और हांसी सब डिपो की बसों को रात्रि ठहराव पर भेजने से इनकार कर दिया है। साझा मोर्चा के सदस्य जयवीर सिंह घनघस ने कहा कि 5 तारीख को प्रशासन और मुख्यालय अधिकारियों की मौजूदगी में 15 दिन का समय मांगा गया था, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

वहीं हरियाणा रोडवेज सांझा मोर्चा के सदस्य जगदीप लाठर ने बताया कि वर्ष 2023 से लंबित TA बिल, ACP, मेडिकल भत्ता और अन्य कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों का निपटारा नहीं किया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि डिपो स्तर की कई फाइलें लंबित हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारी नेताओं ने महाप्रबंधक को अंतिम समय देते हुए कहा है कि यदि लंबित मामलों का समाधान नहीं हुआ तो आगामी दिनों में चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन का निर्णय लिया जा सकता है।

हरियाणा रोडवेज जागृति मंच के राज्य प्रधान सुरेंद्र सिंह ने कहा कि हिसार रोडवेज के महाप्रबंधक पर कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 40 दिनों से कर्मचारियों का धरना जारी है, लेकिन महाप्रबंधक केवल आश्वासन दे रहे हैं और लंबित मामलों का समाधान नहीं कर रहे। उनका आरोप है कि जिन कार्यों को कुछ घंटों में पूरा किया जा सकता है, वे भी जानबूझकर लंबित रखे जा रहे हैं। सुरेंद्र सिंह ने कहा कि 5 तारीख को कर्मचारियों ने जनहित में आंदोलन स्थगित किया था ताकि आम जनता को परेशानी न हो, लेकिन प्रशासन की ओर से वादे पूरे नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि महाप्रबंधक का रवैया तानाशाहीपूर्ण है और कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों ने प्रशासन को अंतिम समय दिया है। यदि लंबित मांगों का समाधान नहीं हुआ तो रोडवेज कर्मचारी चक्का जाम जैसे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
 

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