Edited By Isha, Updated: 11 Jun, 2026 12:12 PM

करीब 24 साल पुराने हत्याकांड में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने ओमपति और रिसाला की अपील स्वीकार कर उन्हें दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने सह-आरोपी सतबीर की अपील खारिज करते हुए उसकी उम्र कैद की सजा बरकरार एनएस शेखावत और जस्टिस एचएस
चंडीगढ़: करीब 24 साल पुराने हत्याकांड में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने ओमपति और रिसाला की अपील स्वीकार कर उन्हें दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने सह-आरोपी सतबीर की अपील खारिज करते हुए उसकी उम्र कैद की सजा बरकरार एनएस शेखावत और जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी मेडिकल साक्ष्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाती। मामला मार्च 2002 में भिवानी जिले के ककरोली हुक्मी गांव में हुई सोमबीर की हत्या से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार रिसाला और उसकी पत्नी ओमपति ने सोमबीर को पकड़ रखा था जबकि सतबीर उसके सिर पर कुल्हाड़ी से लगातार वार कर रहा था। गंभीर चोटों के कारण सोमबीर की मौत हो गई थी।
सत्र न्यायालय ने 2004 में तीनों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और विशेषज्ञ गवाही का विस्तृत परीक्षण किया गया। अदालत ने पाया कि रिसाला पहले से पैर की गंभीर चोट से पीड़ित था और लाठी के सहारे चलता था। ओमपति ने दावा किया कि घटना के समय वह गांव के स्कूल में ड्यूटी पर थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों के खिलाफ केवल मृतक को पकड़कर रखने का आरोप था। उनके कब्जे से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और न कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने आया।
इसके विपरीत सतबीर के खिलाफ प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, उसकी निशानदेही पर बरामद खून से सनी कुल्हाड़ी और फोरेंसिक रिपोर्ट को अदालत ने विश्वसनीय माना। हाई कोर्ट ने कहा कि हत्या के वास्तविक हमलावर के रूप में उसकी भूमिका संदेह से परे साबित होती है।