Edited By Krishan Rana, Updated: 01 Apr, 2026 04:43 PM

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और उपयोग को लेकर सख्त रुख
हरियाणा डेस्क : हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई डॉक्टर मरीज को बाहर से दवा लिखता है तो उसे यह बताना अनिवार्य होगा कि संबंधित दवा अस्पताल में उपलब्ध क्यों नहीं थी। ऐसा न करने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दवा प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का रिकॉर्ड रियल टाइम सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे दवाओं की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा सके।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अस्पतालों में दवाओं की जरूरत का आकलन कर कम से कम चार दिन पहले संबंधित एजेंसियों को सूचित करें, ताकि किसी भी अस्पताल में दवाओं की कमी न हो।
बैठक में डॉक्टरों की कमी को भी गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने आवश्यकतानुसार संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा अस्पतालों में सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं, उपकरणों की उपलब्धता, स्टाफ की गुणवत्ता और सेवाओं में सुधार पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। दवाओं और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के साथ-साथ अस्पतालों में साफ-सफाई, एंबुलेंस सेवा, एलपीजी व्यवस्था और मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
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