भिवानी थाने में अवैध हिरासत का आरोप... हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने एसपी से तलब की रिपोर्ट

Edited By Deepak Kumar, Updated: 22 Oct, 2025 05:08 PM

haryana human rights commission summons report from sp for illegal detention

जिला भिवानी के गांव धाना जंगा के निवासी अशोक कुमार ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसके भाई, जगजीत ने थाना सदर, भिवानी में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई।

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : जिला भिवानी के गांव धाना जंगा के निवासी अशोक कुमार ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसके भाई, जगजीत ने थाना सदर, भिवानी में एक झूठी शिकायत दर्ज कराई। उक्त शिकायत के आधार पर थाना प्रभारी, थाना सदर, भिवानी ने ए.एस.आई. वीरेंद्र सिंह को मामले की जांच सौंपी। आगे आरोप लगाया गया है कि दिनांक 13.06.2025 को ए.एस.आई. वीरेंद्र सिंह ने शिकायतकर्ता को थाना सदर, भिवानी बुलाया और उसे फोन पर धमकाया। शिकायतकर्ता के थाना पहुंचने पर, उसे धमकियों का सामना करना पड़ा और बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी के सुबह से लेकर शाम तक थाने में एक अभियुक्त की तरह बैठाए रखा गया। चिकित्सीय परीक्षण के बाद शिकायतकर्ता को लॉक-अप में रखा गया और उस पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धाराएं 126 एवं 170 (जिसे शिकायत में धारा 107/151 दं.प्र.सं. के रूप में संदर्भित किया गया है) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता रातभर हिरासत में रहा और अगले दिन उसे उपमंडल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। शिकायतकर्ता ने दोषी पुलिस अधिकारी ए.एस.आई. वीरेंद्र सिंह के विरुद्ध उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने स्पष्ट किया है कि दं.प्र.सं. की धाराएं 107 और 151 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बी.एन.एस.एस.) की धाराओं 126 और 170 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। ये प्रावधान समान उद्देश्य और कार्य वाले हैं, जिनका मकसद आसन्न हानि को रोकना और जन सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सर्वोच्च न्यायालय ने “राजेंद्र सिंह पठानिया बनाम राज्य (एनसीटी ऑफ दिल्ली एवं अन्य)” 2011 (13) एस.सी.सी. 329 के मामले में, दं.प्र.सं. की धाराएं 107 और 151 की व्याख्या करते हुए निम्नलिखित कहा है —

“14. धारा 107/151 दं.प्र.सं. का उद्देश्य दंडात्मक नहीं बल्कि निवारक न्याय है। धारा 151 का उपयोग तभी किया जाना चाहिए जब शांति भंग का आसन्न खतरा हो या धारा 107 के अंतर्गत शांति भंग की संभावना हो। धारा 151 के अंतर्गत गिरफ्तारी तभी उचित है जब गिरफ्तारी किए जाने वाले व्यक्ति के बारे में यह जानकारी हो कि वह कोई संज्ञेय अपराध करने की योजना बना रहा है। यदि धारा 107/151 के अंतर्गत कार्यवाही आवश्यक प्रतीत होती है, तो संबंधित प्राधिकारी के लिए त्वरित कार्रवाई करना अनिवार्य होता है। मजिस्ट्रेट को धारा 107 के तहत अधिकार आपात स्थिति में प्रयोग करने होते हैं।

धारा 151 दं.प्र.सं. का सामान्य अवलोकन स्पष्ट करता है कि पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। ऐसा तभी किया जा सकता है जब पुलिस अधिकारी को यह जानकारी हो कि संबंधित व्यक्ति कोई संज्ञेय अपराध करने की योजना बना रहा है और यह भी प्रतीत हो कि अपराध को अन्यथा रोका नहीं जा सकता। यदि ये शर्तें पूरी नहीं होतीं और फिर भी गिरफ्तारी की जाती है, तो गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 में निहित मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए कानून के तहत कार्यवाही का सामना कर सकता है।”

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने अपने आदेश में लिखा है कि उपरोक्त विधिक स्थिति के आलोक में, यदि धारा 170 बी.एन.एस.एस. (धारा 151 दं.प्र.सं.) के अंतर्गत निर्धारित शर्तें पूरी नहीं की जाती और किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 22 में निहित मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए कार्यवाही हेतु उत्तरदायी हो सकता है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित बिंदु विचारणीय हैं—

समन का आधार: शिकायतकर्ता को थाना सदर, भिवानी बुलाने का क्या आधार था और क्या विधि के अनुसार धारा 126 एवं 170 बी.एन.एस.एस. (107/151 दं.प्र.सं.) की प्रक्रिया का पालन किया गया।

अवैध निरुद्धता / लम्बे समय तक रोक: किन परिस्थितियों में शिकायतकर्ता को कई घंटों तक थाना परिसर में बैठाए रखा गया और क्या इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश या औचित्य मौजूद था।

गिरफ्तारी / निवारक कार्रवाई की आवश्यकता: क्या इस मामले में धारा 126 एवं 170 बी.एन.एस.एस. (107/151 दं.प्र.सं.) के अंतर्गत निवारक या दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक थी और क्या इसके लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

जांच अधिकारी की भूमिका और आचरण: ए.एस.आई. वीरेंद्र सिंह के आचरण का विस्तृत विवरण, जिसमें धमकियों, निरुद्धता तथा प्रक्रिया में संभावित त्रुटियों का उल्लेख हो।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बताया कि न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने भिवानी के पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया गया है कि उपरोक्त बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट आयोग के जांच निदेशक के माध्यम से, अगली सुनवाई की तिथि 17.12.2025 से पूर्व प्रस्तुत करे।
 

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