खौफनाक घटना...पांच वर्षीय मासूम पर कुत्तों के झुंड ने किया हमला, लोगों में दहशत

Edited By Harman, Updated: 19 Jun, 2026 10:35 AM

five year old boy attacked by a pack of dogs in rewari

शहर की पॉश कॉलोनी सेक्टर-3 में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां पांच वर्षीय एक मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का भयावह वीडियो भी सामने आया है,...

रेवाड़ी (महेंद्र भारती) : शहर की पॉश कॉलोनी सेक्टर-3 में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां पांच वर्षीय एक मासूम बच्चे पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना का भयावह वीडियो भी सामने आया है, जिसने क्षेत्रवासियों में डर और आक्रोश पैदा कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, घायल बच्चा अपने नाना रिटायर्ड ऑनरेरी कैप्टन मोहिंद्र के घर छुट्टियां बिताने के लिए आया हुआ था। इसी दौरान सेक्टर-3 में खेलते समय कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्चे को दो स्थानों पर काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। परिजनों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार किया गया। घटना के बाद सेक्टर-3 के निवासियों में भारी रोष है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। सेक्टर-3 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान ने भी इस मामले को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद द्वारा आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या से निपटने के लिए लाखों रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन धरातल पर इसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि यदि शहर के पॉश क्षेत्रों में इस तरह के हालात हैं तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों और बंदरों के बढ़ते आतंक पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम या नागरिक को ऐसी घटना का शिकार न होना पड़े। फिलहाल इस घटना के बाद सेक्टर-3 के लोग भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं।

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