Edited By Manisha rana, Updated: 03 Jan, 2026 03:15 PM

सर्दी का आगमन हो चुका है और सर्दी के साथ-साथ नए साल का भी आगाज हो चुका है। नए साल के पहले ही सप्ताह में धुंध देखने को मिल रही है खासकर ग्रामीण इलाकों में धुंध ज्यादा देखने को मिल रही है।
सिरसा (सतनाम) : सर्दी का आगमन हो चुका है और सर्दी के साथ-साथ नए साल का भी आगाज हो चुका है। नए साल के पहले ही सप्ताह में धुंध देखने को मिल रही है खासकर ग्रामीण इलाकों में धुंध ज्यादा देखने को मिल रही है। धुंध से जहाँ आम लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं यह धुंध किसानों के लिए एक वरदान के रूप में साबित हो रही है।
कल और परसों सिरसा जिला में हुई हलकी बूंदाबंदी से भी किसानों को राहत मिली है हालांकि इस बारिश से आम लोगों को भी काफ़ी राहत मिली है। बारिश होने से लोगों को सुखी ठंड से निजात मिली है। ठंड और धुंध का सीजन अगले एक महीने तक चलता रहेगा और किसानों की फ़सल की स्थिति और भी अच्छी होती रहेगी।
क़ृषि विभाग के उप निदेशक डॉ सुखदेव सिंह कंबोज ने बताया कि सिरसा व आसपास के इलाकों में पिछले दिनों से हुई हल्की बूंदाबंदी से फसलों को काफ़ी फायदा मिलेगा। सर्दी और धुंध का मौसम भी गेहूं सरसों और चने की फ़सल के लिए एक रामबाण है। बारिश के बाद अब धुंध पड़ने से भी गेहूं , सरसों और चने की फसलों को लाभ मिल रहा है। फिलहाल गेहूं , सरसों और चने की फसल को सूखे पाले की वजह से ख़राब होने की स्थिति में थी लेकिन अब इस बरसात और धुंध से इन फसलों को फायदा होगा। इससे किसान खुश दिखाई दे रहे है और उन्हें उम्मीद है कि इस बरसात के बाद उनकी गेहूं , सरसों और चने की फसल के उत्पादन में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
किसानों को उम्मीद है कि आगे आने वाले दिनों में और भी बारिश और धुंध होने की उम्मीद है जिससे उनकी रबी की फसलों को फायदा मिलेगा। वहीं कृषि वैज्ञानिक भी इस बरसात और धुंध से मौजूदा फसलों के लिए फायदा बता रहे है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले दिनों तक सिरसा में धुंध के जारी रहने की संभावना है। पिछले दिनों सिरसा जिला में हुई हल्की बूंदाबंदी से किसानों की गेहूं , सरसों और चने फसलों को फायदा मिलेगा। सिरसा जिला में 2 लाख 95 हजार हेक्टेयर में गेहूं और 65 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई की गई है। इसके साथ ही 3 हजार हेक्टेयर में चने की बिजाई की गई है। अगले आने वाले दिनों में और भी कोहरा होने की संभावना है जिससे फसलों को फायदा मिलेगा।
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