हरियाणा: लॉकडाउन में जिंदा दफन कर दी थी करोड़ों मुर्गियां, अब अंडों के भाव में आया उबाल

Edited By vinod kumar, Updated: 15 Oct, 2020 04:08 PM

egg prices go up in haryana

कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान पोल्ट्री फार्म मालिकों ने करोड़ों मुर्गियां जिंदा दफना दी थी। जिसका परिणाम अब यह सामने आ रहा कि अंड़ों के भाव में उछाल आ गया है। पहले जो एक 30 अंडों की ट्रे 90 से 100 में मिल...

जींद (अनिल कुमार): कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान पोल्ट्री फार्म मालिकों ने करोड़ों मुर्गियां जिंदा दफना दी थी। जिसका परिणाम अब यह सामने आ रहा कि अंड़ों के भाव में उछाल आ गया है। पहले जो एक 30 अंडों की ट्रे 90 से 100 में मिल जाती थी वो अब 180 से 200 रुपये में मिल रही है। जहां फरवरी-मार्च में थोक में प्रति अंडा 3.30 रुपये मिल रहा था, जो अब 8 रुपये के नजदीक पहुंच गया। कोरोना के कारण एक तो ग्राहक नहीं मिल रहे है और दूसरी तरफ अंडों के भाव इतने बढ़ गए की लोग खरीद ही नहीं रहे। 

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बता दे की लॉकडाउन के दौरान अंडों की बिक्री न होने और फीड न मिलने के कारण विवश होकर मुर्गी पालकों ने लगभग एक करोड़ मुर्गियां जिंदा दफना दी थीं। इससे उत्पादन भी एक तिहाई घट गया है। अगर लॉकडाउन से पहले अंडों के भाव पर नजर डालें तो फरवरी-मार्च में थोक में प्रति अंडा 3.30 रुपये मिल रहा था, जो अब 8 रुपये के नजदीक पहुंच गया है।

इस बारे प्रदेश के बड़े अंडा व्यवसायी राजू मोर ने कहा कि हरियाणा से प्रति दिन दो से सवा दो करोड़ अंडे की आपूर्ति होती है। अंडा उत्तर प्रदेश, बिहार व पूर्वोत्तर के प्रदेशों असम, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड आदि में होता है। नए फार्म शुरू करने में बहुत खर्चा है। इस इस कारण अभी अंडों के भाव कम नहीं होंगे, बल्कि और भी भाव बढ़ने की आशंका है। 

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लॉकडाउन में हुआ नुकसान
देश में कोरोना से बचाव के लिए 24 मार्च को लॉकडाउन शुरू हुआ था और 30 मई तक लोग घरों में रहे थे। इस कारण अंडों की बिक्री बंद हो गई थी। ट्रांसपोर्ट बंद होने से लेयर फार्म यानि अंडा फार्मों पर फीड (मुर्गियों के भोजन) की कमी हो गई थी। लेयर फार्मों से कोई एक रुपये में भी अंडा उठाने को तैयार नहीं था। इससे मुर्गी पालकों को लगातार घाटा हो रहा था। घाटे से बचने के लिए हरियाणा में ही मुर्गी पालकों ने करीब एक करोड़ मुर्गियों को जिंदा ही दफना दिया। प्रदेश के लगभग 25 फीसद पोल्ट्री फार्म बंद हो गए थे। 

वहीं जब रेहड़ी लगाकर अंडे बेच रहे विक्रेता से बात की तो उसने कहा कि कोरोना के कारण एक तो ग्राहक नहीं मिल रहे है और दूसरी तरफ अंडो के भाव इतने बढ़ गए की लोग खरीद ही नहीं रहे है। अब ये भी घाटे का सौदा बनता जा रहा है। बेरोजगारी में करें तो क्या करें। पहले जो एक 30 अंडों की ट्रे 90 से 100 में मिल जाती थी वो अब 180 से 200 रुपये में मिल रही है। अब किस भाव में बेचे समझ ही नहीं आ रहा है। 

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