धर्मनगरी में हुड्डा और बीरेंद्र सिंह की गुफ्तगू, क्या ये नए सियासी 'महाभारत' का इशारा है ?

Edited By Saurabh Pal, Updated: 08 Feb, 2024 06:55 PM

bhupendra hooda and birendra singh meet in kurukshetra

धर्मनगरी में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुलाकात हरियाणा में नए सियासी 'महाभारत' का इशारा कर रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी गलियारों में तमाम तरह की अटकलें लगने...

कुरुक्षेत्रः धर्मनगरी में पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुलाकात हरियाणा में नए सियासी 'महाभारत' का इशारा कर रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी गलियारों में तमाम तरह की अटकलें लगने लगी हैं। माना जा रहा है कि जेजेपी के गठबंधन को लेकर भाजपा से नाराज चौधरी बीरेंद्र सिंह और कांग्रेस में अंदरूनी खिचड़ी पक रही है।

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इन अटकलों को और बल तब मिल जाता है जब भाजपा के बड़े नेता कहे जाने वाले चौधरी बीरेंद्र सिंह की जुबां से कांग्रेस प्रेम छलकता है और वो सोनिया गांधी की तारीफ में कसीदे पढ़ने से पीछे नहीं हटते। चौधरी बीरेंद्र सिंह के कांग्रेस में जाने की अटकलों के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि बीरेंद्र सिंह नहीं चाहते कि भाजपा और जजपा का गठबंधन आगामी चुनावों में भी रहे। इसके लिए बीरेंद्र सिंह ने पहले भी कई बार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर उन्हें गठबंधन तोड़ने की सलाह दे चुके हैं।  मगर कामयाबी नहीं मिली तो 2 अक्टूबर को जींद में हुई रैली में बीरेंद्र सिंह का मंच से बागी तेवर भी दिखा, जिसमें उन्होंने दो टूक कह दिया था कि अगर आगामी चुनावों में भाजपा ने जेजेपी का साथ नहीं छोड़ा, तो वह भाजपा का ही साथ छोड़ देंगे।

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चौधरी बीरेंद्र सिंह के बार-बार गठबंधन तोड़ने की सलाह पर भाजपा हाईकमान की ओर से अभी तक कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है। जिसके चलते डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और बीरेंद्र सिंह के परिवार के बीच पिछले कई महीनों से खुलकर जुबानी वार-पलटवार का दौर छिड़ा हुआ है। 

बता दें कि, बीरेंद्र सिंह और हुड्डा के बीच सियासी नजदीकियों के अलावा पारिवारिक संबंध भी हैं, दोनों मामा-बुआ के लड़के हैं, ऐसे में आज महाभारत की धरा कुरुक्षेत्र में दोनों नेताओं की ये मुलाकात हरियाणा की सियासत में नई हलचल पैदा कर रही है।

बीरेंद्र सिंह का ज्यादातर राजनीतिक जीवन कांग्रेस में गुजरा है, और वो खुद कहा करते हैं कि मैं कांग्रेस को छोड़ता नहीं अगर मुझे मजबूर नहीं किया जाता। हालांकि, चौधरी बीरेंद्र सिंह की एक चेतावनी को छोड़ दें तो अभी तक उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन माना यही जा रहा है कि भाजपा-जजपा का गठबंधन आगामी चुनावों में भी चल सकता है, ऐसे में उचाना सीट को लेकर छिड़ी खींचतान के चलते चौधरी बीरेंद्र सिंह भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में घर वापसी कर सकते हैं।  

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