हरियाणा में अब कृषि वन वृक्षारोपण, पेड़ और गार्डन भी वन की श्रेणी में आएंगे, सरकार ने बदले नियम

Edited By Manisha rana, Updated: 21 Aug, 2025 07:57 AM

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हरियाणा में पहली बार पेड़ों को लेकर बड़े स्तर पर सरकार ने बदलाव किए हैं। इसके बाद पेड़ों को लेकर तय मापदंड में बहुत से बदलाव देखने को मिलेंगे। इन बदलाव के पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक केस है।

चंडीगढ़ : हरियाणा में पहली बार पेड़ों को लेकर बड़े स्तर पर सरकार ने बदलाव किए हैं। इसके बाद पेड़ों को लेकर तय मापदंड में बहुत से बदलाव देखने को मिलेंगे। इन बदलाव के पीछे सुप्रीम कोर्ट का एक केस है।

दरअसल गोदावर्मन मामले में 12 दिसम्बर, 1996 के अपने आदेश और उसके बाद के निर्देशों के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने यह माना था कि वन शब्द के लिए कोई डिक्सनरी मीनिंग नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्यों को ऐसे सभी वन एरिया की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया था। इस रिपोर्ट के लिए कहा गया था कि वह एरिया चाहे वे भारतीय वन अधिनियम के तहत नोटिफाई हों, रैवेन्यू रिकॉर्ड में हो, या केवल डिक्सनरी मीनिंग में ही हो। इससे यह तय होगा कि वन (संरक्षण) एक्ट, 1980 के रूल सभी नेचुरल फॉरेस्ट लैंड पर एक जैसे लागू हो सकें।

अब वन के लिए ये सरकार ने क्या बनाया मापदंड
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जमीन का एक टुकड़ा डिक्सनरी मीनिंग के अनुसार वन माना जाएगा यदि वह इन शर्तों को पूरा करता होगा। पहला यदि वह टुकड़ा, अलग-थलग है और मिनिमम 5 हैक्टेयर एरिया में फैला हुआ है। इसके अलावा यदि वह सरकार द्वारा नोटिफाई वनों से सटा हुआ है तो न्यूनतम 2 एकड़ क्षेत्रफल एरिया होना चाहिए। इसके अलावा, उसका कैनोपी डॅसिटी 0.4 या उससे अधिक होना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि नोटिफिकेशन में कहा गया है, बशर्ते कि, सरकार द्वारा नोटिफाई वनों के बाहर स्थित सभी लीनियर, कॉम्पैक्ट, एग्रो फॉरेस्ट प्लांटेशन और बगों को इस परिभाषा के तहत वन नहीं माना जाएगा। वन भूमि की नोटिफिकेशन के बाद सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया जाएगा।

वन की डिफनीशन के बाद अब सरकार अगला कदम उन जमीनों की पहचान करना है जो इसके अंतर्गत आती हैं। ये निजी जमीनें, सामुदायिक जमीनें या पंचायती जमीनें भी हो सकती हैं। इसके लिए 2 कमेटियां बनाई गई हैं। पहली कमेटी, उपायुक्त के अधीन जिला स्तरीय कमेटी होगी, जो इस मामले में प्रस्ताव भेजेगी। इसके बाद दूसरी कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव के अधीन स्टेट लैवल कमेटी उन प्रस्तावों पर विचार करेगी और अपनी सिफारिशें देगी। वन भूमि की नोटिफिकेशन के बाद, मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया जाएगा।

हरियाणा में अभी 3,307.28 वर्ग किलोमीटर है वन क्षेत्र
हरियाणा में अभी कुल फॉरैस्ट एरिया 3,307.28 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,614.26 वर्ग किलोमीटर वनावरण और 1,693.02 वर्ग किलोमीटर वृक्षावरण शामिल है। यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 7.48 प्रतिशत है। वनावरण 1,614.26 वर्ग किलोमीटर, जो राज्य के 3.65त्न क्षेत्र को कवर करता है। वृक्षावरण 1,693.02 वर्ग किलोमीटर, जो राज्य के 3.83 फीसदी क्षेत्र को कवर करता है। महत्वपूर्ण है कि हरियाणा में वन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम है, और राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए 20 फीसदी कवरेज का लक्ष्य है।

नई परिभाषा में आने वाली भूमि को प्राप्त होगा संरक्षण : ए.सी.एस.
हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण ने बताया कि हमने गोदावर्मन मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वन को परिभाषित किया है। इससे पहले, कोई परिभाषा नहीं थी। वन की श्रेणी में किसे रखा जाए, इस पर अस्पष्टता थी। अब, इस परिभाषा के अंतर्गत आने वाली सभी भूमि को वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त होगा।

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