अमरेली की सहकारी आंदोलन में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करते मनीष संघानी

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 05 Mar, 2026 08:10 PM

manish sanghani strengthening democratic values  in amreli s cooperative movem

मनीष संघानी का मानना है कि सहकारी संस्थाएं सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए नहीं होतीं, बल्कि समाज को जोड़ने और मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

गुड़गांव ब्यूरो : प्रमुख सहकारी क्षेत्रों में से एक अमरेली में मनीष संघानी सहकारी संस्थाओं के ज़रिये समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वे अमरेली डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव यूनियन (ADCU) के अध्यक्ष हैं और उनका नेतृत्व सेवा, पारदर्शिता और सभी को साथ लेकर चलने पर आधारित है। मनीष संघानी ऐसे परिवार से आते हैं, जो लंबे समय से सहकारी क्षेत्र और जनसेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता दिलीप संघानी देश के जाने-माने सहकारी नेता हैं और नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) व इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव (IFFCO) जैसे बड़े संगठनों से जुड़े हुए हैं। बचपन से ही मनीष को समाज सेवा और सहकारी मूल्यों की समझ मिली।

 

सहकारी सोच पर आधारित नेतृत्व

मनीष संघानी का मानना है कि सहकारी संस्थाएं सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए नहीं होतीं, बल्कि समाज को जोड़ने और मजबूत करने का माध्यम भी हैं। ADCU में उनके कार्यकाल के दौरान पारदर्शिता, सभी सदस्यों की भागीदारी और ईमानदार निर्णय प्रक्रिया पर खास ध्यान दिया गया है। वे खुद को किसी बड़े अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक सहयोगी के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि सहकारी संस्थाओं के फैसले सभी सदस्यों की राय से होने चाहिए, ताकि हर व्यक्ति खुद को उस संस्था का हिस्सा महसूस करे।

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    परंपरा और आधुनिक सोच का मेल

    मनीष संघानी सहकारी क्षेत्र की पुरानी परंपराओं का सम्मान करते हैं, लेकिन समय के साथ बदलाव को भी जरूरी मानते हैं। इसी सोच के तहत वे सोशल मीडिया जैसे आधुनिक माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों से सीधे जुड़ते हैं। उनका सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ प्रचार के लिए नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि वे आम लोगों से मिलते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं। इससे युवा वर्ग भी सहकारी आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहा है।

     

    स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती

    अमरेली जैसे ग्रामीण इलाकों में सहकारी संस्थाएं रोजगार, आर्थिक सहयोग और विकास का आधार होती हैं। मनीष संघानी के नेतृत्व में ये संस्थाएं सिर्फ कागज़ी काम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि लोगों की आमदनी और जीवन स्तर सुधारने में मदद कर रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे “सहकार से समृद्धि” जैसे कार्यक्रमों का असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है, जिसमें अमरेली की सहकारी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

     

    युवाओं को जोड़ने की पहल

    सहकारी क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती युवाओं की भागीदारी रही है। इसे समझते हुए मनीष संघानी ने युवाओं को सहकारी सोच से जोड़ने के प्रयास किए हैं।

    कॉलेज और कैंपस आधारित सहकारी समितियों के ज़रिये छात्रों को बचत, वित्तीय समझ और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनुभव दिया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी इस आंदोलन को आगे बढ़ा सके।

    विरासत से आगे अपनी पहचान

    हालांकि मनीष संघानी को एक मजबूत पारिवारिक विरासत मिली है, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। वे सिर्फ नाम के भरोसे नहीं, बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का भरोसा जीतते हैं।

    उनके साथी उन्हें धैर्य से सुनने वाला, सभी को साथ लेकर चलने वाला और सिद्धांतों पर चलने वाला नेता मानते हैं। वे राजनीति से ज़्यादा व्यवस्था और विकास पर ध्यान देते हैं।

     

    क्षेत्रीय नेतृत्व का उदाहरण

    ADCU में मनीष संघानी का कार्य यह दिखाता है कि सही नेतृत्व से सहकारी संस्थाएं समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उनका फोकस संस्था की मजबूती, सदस्यों की भागीदारी और समाज के समग्र विकास पर है।

    आज जब सहकारी आंदोलन को फिर से महत्व मिल रहा है, मनीष संघानी का नेतृत्व यह साबित करता है कि परंपरा और आधुनिक सोच को साथ लेकर चलने से ग्रामीण विकास और सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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