Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 02 Apr, 2025 08:23 PM

गुरुग्राम ईडी कार्यालय के अधिकारियों ने तीन अलग-अल,ग कंपनियों पर कार्रवाई करते हुए करीब 838.61 करोड़ रुपए संपत्तियां कुर्क की है। इन कंपनियों पर अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई है।
गुड़गांव (ब्यूरो): गुरुग्राम ईडी कार्यालय के अधिकारियों ने तीन अलग-अल,ग कंपनियों पर कार्रवाई करते हुए करीब 838.61 करोड़ रुपए संपत्तियां कुर्क की है। इन कंपनियों पर अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई है। ईडी के अनुसार केनरा बैंक और एसबीआई से 176.70 करोड़ रुपए के ऋण की चूक के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित 156.33 करोड़ रुपए की 12 अचल संपत्तियों को कुर्क की हैं। कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम और रोहतक में स्थित 12 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें 20 एकड़ से अधिक की 7 वाणिज्यिक भूमि, रोहतक और गुरुग्राम में स्थित 4 एकड़ कृषि भूमि और मुंबई और दिल्ली में स्थित 4 वाणिज्यिक फ्लैट-सह-कार्यालय शामिल हैं। ईडी ने मेसर्स लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। लिमिटेड, प्रमोटर ललित के जैन, राजेश के जैन, विजय कुमार जैन और अन्य के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए आईपीसी, 1860 की धारा 120 बी और 420 के तहत अपराधों से संबंधित है। आरोपों में गलत बयानी/ तथ्यों को छिपाकर बैंकों के संघ को धोखा देना, ऋणदाता बैंक की सहमति के बिना गिरवी रखी गई संपत्तियों का निपटान करना और संबंधित कंपनियों के साथ बेईमानी से व्यापार करना शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप बैंकों के संघ को 176.70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में, सीबीआई ने भी आरोप पत्र दायर किया है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट देनदार की समाधान प्रक्रिया को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है और माननीय एनसीएलटी ने कॉर्पोरेट देनदार के परिसमापन की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।
लखानी समूह की 11 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क
वहीं ईडी की टीम ने मेसर्स लखानी इंडिया लिमिटेड, मेसर्स लखानी रबड़ उद्योग प्राइवेट लिमिटेड, लखानी अपैरल प्राइवेट लिमिटेड और अन्य समूह कंपनियों से संबंधित बैंक धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 110 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 7 अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। ईडी ने सीबीआई, दिल्ली और चंडीगढ़ द्वारा वर्ष 2021 और 2023 के दौरान आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मेसर्स लखानी इंडिया लिमिटेड और अन्य समूह कंपनियों के साथ-साथ प्रमोटर पीडी लखानी और सुमन लखानी के खिलाफ विभिन्न बैंकों के साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और धोखाधड़ी के अपराधों से संबंधित कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। ईडी की जांच से पता चला कि कंपनी मेसर्स। लखानी इंडिया लिमिटेड और समूह की कंपनियों ने संयुक्त रूप से इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक के साथ गबन और अन्य समूह कंपनियों में धन का डायवर्जन, साजिश, गलत तथ्य प्रस्तुत करना और धोखाधड़ी करके धोखाधड़ी की है, जिसके परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता बैंकों को 162 करोड़ रुपए (लगभग) की धोखाधड़ी हुई है। ईडी की जांच में आगे पता चला कि शिकायतकर्ता बैंकों द्वारा वितरित किए गए व्यवसाय/पूंजी ऋण और ऋण सुविधाओं में से, लखानी समूह ने प्रमोटरों के निर्देश पर संबंधित पक्षों को घाटे में बिक्री की, सहयोगी कंपनियों के ऋण चुकाए, निदेशकों को असामान्य ब्याज भुगतान किया। ईडी ने अब तक एनसीआर क्षेत्र में 20 एकड़ से अधिक के 5 वाणिज्यिक भूखंडों, 2 एकड़ के फार्म हाउस और एक वाणिज्यिक फ्लैट-सह-कार्यालय का पता लगाया है और उन्हें अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड व अन्य की 286.98 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क
इसके अलावा ईडी के अधिकारियों ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटर निर्मल सिंह और अन्य की 286.98 करोड़ रुपये की भूमि के रूप में अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इसके अलावा, विदुर भारद्वाज नामक एक अन्य प्रमोटर से जुड़े जी4एस सिक्योर सॉल्यूशंस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में 108.04 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर भी कुर्क किए गए हैं। ईडी ने मेसर्स थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 5 के तहत जारी किए गए अनंतिम कुर्की आदेश गत 28 मार्च 2025 के तहत कुल 395.03 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की थी। ईडी ने सैकड़ों घर खरीदारों को ठगने के आरोप में थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की। कंपनी हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर 89 में ग्रीनोपोलिस नामक एक आवासीय परियोजना विकसित कर रही थी और उसने घर खरीदारों से 873.83 करोड़ रुपए एकत्र किए थे। हालांकि, नौ साल बाद भी परियोजना अधूरी रही और निवेशकों को फ्लैट नहीं दिए गए। ईडी ने नवंबर 2024 को थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों के आवासों और अन्य स्थानों पर तलाशी ली, जिससे स्पष्ट रूप से आपत्तिजनक दस्तावेज एकत्र हुए। ईडी ने जांच के दौरान पाया कि थ्री सी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने अपने प्रमोटरों के माध्यम से ग्रीनोपोलिस परियोजना में फ्लैटों की बुकिंग के संबंध में निर्दोष फ्लैट खरीदारों से 873.83 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त की है।