मानसून एडवांस में आने से हथिनीकुंड की सुरक्षा में चल रहा कार्य प्रभावित, 30 जून तक पूरा करने का है लक्ष्य

Edited By Isha, Updated: 26 Jun, 2025 04:42 PM

work going on for the protection of hathinikund is affected

पिछले तीन-चार वर्षो में पहाड़ों पर अधिक वर्षा होने के चलते हथिनीकुंड बैराज की डाउनस्ट्रीम में काफी नुकसान हुआ था। जिस पर हरियाणा सरकार ने सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर बैराज के प्रोडक्शन के लिए टेंडर अलाट किए

यमुनानगर(सुरेंद्र मेहता ): पिछले तीन-चार वर्षो में पहाड़ों पर अधिक वर्षा होने के चलते हथिनीकुंड बैराज की डाउनस्ट्रीम में काफी नुकसान हुआ था। जिस पर हरियाणा सरकार ने सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर बैराज के प्रोडक्शन के लिए टेंडर अलाट किए थे। यह काम तेजी से चल रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में दो बार आई वर्षा के चलते यह कार्य प्रभावित हुआ है।  27 जून को यह कार्य पूरा होना था, परंतु अब उसे 30 जून तक पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है। 

सिंचाई विभाग के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर आर एस मित्तल का कहना है कि हथिनीकुंड बैराज पर, बैराज की सुरक्षा का कार्य तेजी से किया जा रहा है, हालांकि वर्षा के कारण यह कार्य प्रभावित हुआ है, लेकिन इसे अब 30 जून तक हर हालत में पूरा किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी के दिशा निर्देश पर बैराज की टेंपरेरी प्रोटेक्शन का कार्य किया गया है।
 
आर एस मित्तल ने कहा कि बैराज की सुरक्षा में जिस एजेंसी ने काम किया है अगर मानसून के दौरान उसको कोई नुकसान होता है तो उसकी भरपाई इस एजेंसी द्वारा की जाएगी। और जो भी कार्य किया जाएगा विभाग उसके लिए अतिरिक्त राशि नहीं देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि  बैराज की सुरक्षा को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है।
  
आर एस मित्तल ने बताया कि जहां पहले  70000 क्यूसेक से अधिक पानी होने पर  हथिनी कुंड बैराज के सभी 18 गेट खोले जाते थे, वहीं अब यह एक लाख क्यूसेक पानी होने के बाद बैराज के सभी गेट खोले जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक लाख क्यूसेक पानी होने पर पहले तीन बार सायरन बजाया जाता है ताकि लोग सतर्क हो जाएं और यमुना के आसपास है तो दूर हो जाएं। इसी तरह प्रशासन को भी सूचना दी जाती है, और प्रशासनिक अधिकारी यमुना के साथ लगते गांव में चेतावनी भेज देते हैं, ताकि जान माल का नुकसान ना हो।

सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ने बताया कि बाढ़ रोकथाम के लिए अधिकांश कार्य पूरे होने वाले हैं, काम कर रही है एजेंसियों को कहा गया है कि 30 जून से पहले वह काम पूरे कर लें, क्योंकि 1 जुलाई से 30 सितंबर का समय मानसून का होता है, इस दौरान कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता।

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