हरियाणा विधानसभा मानसून सत्र में भारी हंगामा, हुड्डा बोले- ऐसा लगा सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे थे, विधायकों के विरुद्ध किया बल प्रयोग

Edited By Harman, Updated: 27 Aug, 2026 12:35 PM

uproar in haryana assembly monsoon session

चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में’ ये नारे लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने आज विधानसभा तक मार्च किया। मॉनसून सत्र के पहले दिन उन्होंने काले कपड़े पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के साथ हुई...

चंडीगढ़ : चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में’ ये नारे लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने आज विधानसभा तक मार्च किया। मॉनसून सत्र के पहले दिन उन्होंने काले कपड़े पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने विधायकों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकइटिंग की और बल प्रयोग किया। इससे कई विधायकों को चोटें आईं।

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 हुड्डा बोले- ऐसा लगा सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे

इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि चाहे जंतर-मंतर हो या विधानसभा मार्च, देश के हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनके साथ किसी भी तरह का बलप्रयोग संविधान और लोकतंत्र विरोधी है। जिस तरह पुलिस मुझे और विधायकों को धक्के मार रही थी, ऐसा लग रहा था कि सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे थे।

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उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक और चढ़ावा चोरी, दोनों ऐसे मुद्दा हैं, जिनसे बीजेपी सरकार लगातार आंख चुराती रही। लेकिन जब विपक्ष ने आवाज उठाई और जनता आंदोलनरत हुई तो सरकार ने जांच व कार्रवाई की खानापूर्ती की। लेकिन उसपर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। क्योंकि ये मामला भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले जन-जन को परेशान करने वाला है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चढ़ावा चोरी मुद्दे की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि जांच शुरू करने में देरी क्यों हुई? आरोप जून 2026 के शुरू में सार्वजनिक हुए, 13 जून को एसआईटी बनी। प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को आई, लेकिन FIR 25 जून को दर्ज हुई। आरोप सामने आने के बाद, कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इससे सबूत नष्ट होने या प्रभावित होने का जोखिम था? एसआईटी ने पाया कि गिनती प्रक्रिया में सुरक्षा गार्ड, फ्रिस्किंग, पॉकेट रहित कपड़े, 180 दिन की CCTV फुटेज जैसी अनिवार्य SOP का पालन नहीं हुआ। CCTV सिर्फ 45 दिनों तक रखी गई। ये व्यवस्थाएं क्यों विफल रहीं और जिम्मेदार अधिकारियों/ट्रस्ट प्रबंधन पर प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?  सवाल ये भी कि बड़े नामों को क्लीन चिट कैसे मिली? क्या सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है? क्या निचले स्तर के कर्मचारी इतने हाईटेक और कई लेयर की सिक्युरिटी में करोड़ों की चोरी कर सकते हैं? 

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर कहा कि सरकार ने जिस तरह पैलेट गन से घायल हुए बच्चे की FIR तक लिखने से मना कर दिया था, उसी से सरकार की क्रूर मंशा स्पष्ट हो गई थी। लेकिन जब हमारे नेता राहुल गांधी ने इसका विरोध किया और थाने में धरना दिया, तब सरकार ने मजबूरी में FIR दर्ज की। लेकिन राहुल गांधी के दृढ़ संकल्प ने दिखा दिया कि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा, उसी तरह हरियाणा कांग्रेस भी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी और बीजेपी की जवाबदेही तय करेगी।  

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं-छात्रों के संघर्ष की जीत है। अगर प्रधान शुरुआत में ही नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दे देते तो मासूम छात्रों को ना लाठीचार्ज का सामना करने पड़ता और ना ही इतना संघर्ष करना पड़ता। अब सरकार को उन बच्चों से माफी मांगनी चाहिए, जिनपर लाठीचार्ज करवाया था। लाठीचार्ज करने वाले और छात्रों पर पैलेट गन दागने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही जिन प्रदर्शनकारियों पर केस किए गए हैं, सरकार को वो सारे वापिस लेने चाहिए।  पेपर लीक की समस्या देश में महामारी का रूप ले चुकी है। युवाओं को बीजेपी सरकार की अनदेखी के चलते सड़कों पर आकर आंदोलन करना पड़ा। इसके खिलाफ कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में, छात्रों की गूंज कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया। आखिरकार जनआंदोलन के खिलाफ बीजेपी को झुकना पड़ा। भाजपा सरकार में लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण अब तक 7.50 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हो चुके हैं। यह समस्या केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में भी ताबड़तोड़ पेपर लीक हो रहे हैं। बेरोजगारी की स्थिति यह है कि हर साल मात्र 6 लाख नौकरियों के लिए 9 करोड़ युवा आवेदन करते हैं।

हरियाणा पेपर लीक का गढ़ बन चुका है। हरियाणा में 30 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं — HCS (2023), CET (2023), SI भर्ती (मार्च 2022), डेंटल सर्जन (दिसंबर 2021), PGI रोहतक परीक्षा (2025), पुलिस कांस्टेबल भर्ती (अगस्त 2021), ग्राम सचिव भर्ती (12 जनवरी 2021), क्लर्क भर्ती (दिसंबर 2016), बिजली विभाग क्लर्क भर्ती, एक्साइज इंस्पेक्टर (दिसंबर 2016), एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर (जुलाई 2017), कंडक्टर भर्ती (सितंबर 2017), ITI इंस्ट्रक्टर भर्ती, आबकारी इंस्पेक्टर, नायब तहसीलदार भर्ती, PTI भर्ती, HTET (नवंबर 2015), केंद्रीय विद्यालय संगठन प्राइमरी टीचर (अक्टूबर 2015), असिस्टेंट प्रोफेसर कॉलेज भर्ती घोटाला (फरवरी 2017), B-फार्मेसी पेपर लीक घोटाला (जुलाई 2017), HBSE बोर्ड 10वीं-12वीं पेपर लीक (2025), HTET 2026 (जिसमें बिना सील के पेपर बांटे गए और लीक की आशंका जताई गई) आदि।

पूरे देश में 152 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं। हरियाणा समेत पूरे देश में पेपर और नौकरियों का सौदा करने वाला एक पूरा रैकेट सक्रिय है। यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि जानलेवा साबित हो रही है। सिर्फ NEET पेपर लीक से परेशान होकर देशभर में 26 अभ्यर्थी आत्महत्या कर चुके हैं।
 

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