देशभर में शेरों की घटती संख्या के बीच आई खुशखबरी, शेरों की नई पीढ़ी 'गीता' ने तीन शावकों को दिया जन्म

Edited By Isha, Updated: 25 Oct, 2025 10:14 AM

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शहरी भागदौड़ और कंक्रीट के बसेरों में एक बार फिर प्रकृति की मुस्कान दहाड़ संग लौटी है। वीरवार की रात को जब सब सो रहे थे, तभी स्थानीय चिड़ियाघर के एक कोने में जीवन की नई धड़कनों की दहाड़ गूंजी।

भिवानीः शहरी भागदौड़ और कंक्रीट के बसेरों में एक बार फिर प्रकृति की मुस्कान दहाड़ संग लौटी है। वीरवार की रात को जब सब सो रहे थे, तभी स्थानीय चिड़ियाघर के एक कोने में जीवन की नई धड़कनों की दहाड़ गूंजी। शेरनी गीता ने अपने बाड़े में तीन नन्हे शावकों को जन्म दिया।

तीन नई सांसें, तीन नए गर्जन, जो आने वाले समय में इस धरती की ताकत बनेंगे। यह खबर सिर्फ भिवानी के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए उम्मीद की तरह आई है। ऐसे दौर में जब जंगलों में शेरों की दहाड़ कम होती जा रही है, गीता का फिर से मां बनना प्रकृति की पुनर्जीवित होती शक्ति की निशानी है। गीता इससे पहले भी दो साल पहले शेरा और सिंघम नाम के दो शावकों को जन्म दे चुकी है। अब ये दोनों व्यस्क हो चुके हैं। शेरों की नई पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

एक कठिन सफर के बाद आई यह खुशखबरी

गीता की कहानी संघर्षों से भी जुड़ी है। 2014 में वाच ब्रांडिस की मौत के बाद भिवानी चिड़ियाघर छह वर्षों तक शेर या वाच से खाली रहा। फिर लाकडाउन के बीच उम्मीदें लेकर आए वे तीन शावक और अव वही गीता, जो तव महज एक बच्ची थी, पांच साल में मां की पहचान पा चुकी है। बीते दिनों गीता पर इंदौर से लाए गए शेर शिवा ने हमला भी किया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उस दर्द और डर से उवरकर, आज वही गीता नए जीवन की वाहक बनी है। यह जीत सिर्फ एक शेरनी की नहीं, बल्कि प्रकृति की जिजीविषा की मिसाल है।

 
भिवानी बना शेरों के परिवार का घर भिवानी चिडियाघर का वातावरण इन शेरो को खूब भा रहा है। दिसंबर 2020 में जब रोहतक से तीन शावक, गीता, सुधा और अर्जुन यहां लाए गए थे, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही वर्षों में यह जगह शेरों का सुरक्षित अन्वय बन जाएगी। बाद में इंदौर से आया सिंवा, गीता का साथी बना। दोनों की जोड़ी ने इस बाड़े को जीवंत कर दिया। अब जब तीन नए शावक जन्मे हैं, तो यह न सिर्फ एक जैविक सफलता है, बल्कि एक संवेदनात्मक कहानी भी, भरोसे, देखभाल और प्राकृतिक सामंजस्य की।

शेरनी व शावक अव चिकित्सकीय देखरेख में
चिड़ियाघर प्रशासन ने गीता और उसके शावकों को फिलहाल विशेष निगरानी में रखा है। शावक कुछ महीनों तक मां के साथ अलग पिंजरे में रहेंगे ताकि वे सुरक्षित रहें और धीरे-धीरे दुनिया से परिचित हो सकें। वन्य प्राणी विभाग के इस्पेक्टर देवेंद्र हुड्‌डा बताते हैं, 'शेरनी गीता और उसके तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। चार-पांच महीने बाद लोग इन्हें बाड़े में खेलते देख सकेंगे।

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