ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम में गूंजा श्रमिक अधिकारों का स्वर, AI से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक 41 प्रस्तावों पर बनी सहमति

Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Jul, 2026 09:15 PM

the brics trade union forum echoed the voice of labor rights with consensus rea

हरियाणा से संबंधित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि हैदराबाद में

चंडीगढ़ (चंद्रशेखर धरणी):  हरियाणा से संबंधित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने बताया कि हैदराबाद में आयोजित तीन दिवसीय 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम में सदस्य देशों के श्रमिक संगठनों ने बदलती वैश्विक कार्य व्यवस्था और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर 41 प्रस्तावों वाली व्यापक मसौदा घोषणा जारी की। सम्मेलन में हरियाणा से भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रमुखता से प्रतिनिधित्व किया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के करीब 70 प्रतिनिधि तथा 15 राज्यों से 45 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का समापन बुधवार को होगा।

दूसरे दिन आयोजित सत्र में तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने तकनीकी बदलाव के दौर में श्रमिकों के हितों की रक्षा और समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

तकनीक मानव हित में हो, रोजगार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
'लचीलापन, नवाचार के लिए निर्माण, सहयोग और स्थिरता' विषय पर आधारित मसौदा घोषणा में कहा गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वचालन, रोबोटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से कार्य संस्कृति को बदल रहे हैं। इन तकनीकों से नए अवसर तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन रोजगार की अनिश्चितता, श्रमिक अधिकारों पर खतरा, निजता, बढ़ती असमानता और डिजिटल बहिष्करण जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
घोषणा में सरकारों से पारदर्शी और जवाबदेह कानून बनाने की अपील करते हुए कहा गया कि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक रोजगार को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए।

डिजिटल और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को मिलें समान अधिकार
फोरम ने डिजिटल और प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था में कार्यरत श्रमिकों को समान अधिकार, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय कानूनों को और मजबूत करने तथा श्रमिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा पर विशेष फोकस
मसौदा घोषणा में महिला श्रमिकों को आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए उनकी कार्यबल में भागीदारी और नेतृत्व बढ़ाने की सिफारिश की गई। समान कार्य के लिए समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, मातृत्व सुरक्षा, सस्ती बाल देखभाल सुविधाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा, डिजिटल कौशल और महिला उद्यमियों को वित्तीय एवं बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।
इसके साथ ही कार्यस्थलों पर भेदभाव, हिंसा और उत्पीड़न रोकने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई गई।

हर श्रमिक के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा की वकालत
फोरम ने सामाजिक सुरक्षा को प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार बताते हुए नियमित, असंगठित, स्वरोजगार, प्रवासी, कृषि और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी वर्गों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली लागू करने का आह्वान किया।
प्रतिनिधियों ने बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप जीवनभर सीखने, पुनः प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और डिजिटल शिक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

हरित अर्थव्यवस्था में भी श्रमिक हितों की सुरक्षा जरूरी
जलवायु परिवर्तन और हरित अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हुए घोषणा में कहा गया कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित उद्योगों की ओर बढ़ते समय प्रभावित श्रमिकों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्हें पुनः प्रशिक्षण, नए रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर न्यायपूर्ण परिवर्तन सुनिश्चित किया जाए।

ब्रिक्स देशों के बीच श्रम सहयोग बढ़ाने का आह्वान
41 प्रस्तावों वाली घोषणा में ब्रिक्स देशों के बीच ट्रेड यूनियनों के संस्थागत सहयोग को मजबूत करने, श्रम क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के नियमित संग्रह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल कार्य व्यवस्था और कौशल विकास के लिए साझा नेटवर्क विकसित करने का सुझाव दिया गया।

साथ ही अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ तथा अन्य वैश्विक संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने, न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका मजबूत करने, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने और नीति निर्माण में श्रमिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

पवन कुमार बोले— श्रमिक केंद्रित विकास ही भविष्य की दिशा
भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सामाजिक न्याय एक-दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करें, महिलाओं और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाएं तथा तकनीकी बदलाव के इस दौर में प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित और टिकाऊ रोजगार सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में हुई चर्चा भविष्य की वैश्विक श्रम नीतियों के लिए महत्वपूर्ण दिशा तय करेगी और सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी।

 

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