आउटसोर्सिंग और पार्ट-2 कर्मियों को मिलेगी राहत? मुख्य सचिव कार्यालय ने पुराने निर्देशों के तहत कार्रवाई करने को कहा

Edited By Isha, Updated: 30 Oct, 2026 08:42 PM

outsourcing and part 2 workers will get relief

हरियाणा में समान काम-समान वेतन की मांग कर रहे पार्ट-2, आउटसोर्सिंग और अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दी है। प्रदेश सरकार के मानव संसा

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी):    हरियाणा में समान काम-समान वेतन की मांग कर रहे पार्ट-2, आउटसोर्सिंग और अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दी है। प्रदेश सरकार के मानव संसाधन विभाग की ह्यूमन रिसोर्सेज-3 शाखा ने समान काम-समान वेतन से जुड़े मामले की समीक्षा करते हुए ऊर्जा विभाग को पहले जारी सरकारी निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने की सलाह दी है। मुख्य सचिव कार्यालय के स्तर पर हुई इस कार्रवाई के बाद लंबे समय से वेतन में समानता की मांग उठा रहे कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत अनुबंधित, आउटसोर्सिंग और अस्थायी कर्मचारी लंबे समय से समान काम के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि जब उनसे नियमित कर्मचारियों के समान काम लिया जाता है और उनकी जिम्मेदारियां भी लगभग एक जैसी होती हैं तो केवल नियुक्ति की श्रेणी अलग होने के आधार पर वेतन में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। इसी मांग को लेकर कर्मचारी संगठन समय-समय पर सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष अपना पक्ष रखते रहे हैं।

25 अप्रैल 2025 के पत्र को बनाया महत्वपूर्ण आधार
मानव संसाधन विभाग की ओर से ऊर्जा विभाग के आयुक्त एवं सचिव को भेजे गए पत्र में 25 अप्रैल 2025 को उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को जारी किए गए पत्र का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उक्त पत्र सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही निर्धारित निर्देशों के अनुरूप जारी किया गया था।

इसके साथ ही प्रशासनिक विभाग को 3 नवंबर 2017 को जारी निर्देश संख्या 16/36/2016-3जीएस-II को भी ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार करने की सलाह दी गई है। इस तरह मानव संसाधन विभाग ने समान काम-समान वेतन के मामले में पहले जारी सरकारी निर्देशों और सक्षम स्तर पर प्राप्त स्वीकृति को महत्वपूर्ण आधार बनाया है।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से जारी की गई थी। इसके साथ ही प्रशासनिक विभाग की मूल फाइल भी वापस भेज दी गई है। इस घटनाक्रम को ऊर्जा विभाग में समान काम-समान वेतन से जुड़े मामले की आगे की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पार्ट-2 और आउटसोर्सिंग कर्मियों को फैसले का इंतजार
मानव संसाधन विभाग के इस पत्र से उन कर्मचारियों में विशेष उम्मीद जगी है, जो पार्ट-2, आउटसोर्सिंग और अन्य अनुबंध आधारित व्यवस्थाओं के तहत सरकारी महकमों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है, जो नियमित कर्मचारियों के समान अथवा उनसे मिलते-जुलते कार्य और जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन वेतन और सेवा संबंधी सुविधाओं में अंतर की शिकायत करते रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद वेतन में अंतर होने से उनके साथ आर्थिक असमानता की स्थिति बनी रहती है। उनका मानना है कि सरकार को इस विषय पर मानवीय और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले से जारी निर्देशों के आधार पर समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

अब ऊर्जा विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर
इस पूरे मामले में अब ऊर्जा विभाग की ओर से की जाने वाली अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मानव संसाधन विभाग ने पुराने निर्देशों और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का हवाला देते हुए मामले पर विचार करने की सलाह दी है। हालांकि, इस पत्र से सभी श्रेणियों के कर्मचारियों को समान वेतन मिलने का स्वतः आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारियों के लिए यह मामला आगे बढ़ने की उम्मीद जरूर पैदा करता है।
पार्ट-2, आउटसोर्सिंग और अनुबंधित कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि सरकार वर्षों से लंबित उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेगी। अब देखना होगा कि ऊर्जा विभाग इस सलाह के आधार पर क्या कदम उठाता है और समान काम-समान वेतन की मांग को लेकर आगे क्या प्रशासनिक निर्णय सामने आता है।

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