धान घोटाला: DFSC दफ्तर में SIT का डेरा, बर्खास्त इंस्पेक्टर के खुलासे के बाद मिल मालिकों और अधिकारियों पर शिकंजा

Edited By Isha, Updated: 31 May, 2026 11:06 AM

mill owners and officials tightened after revelations by dismissed inspector

धान घोटाले की जांच के - लिए गठित विशेष टीमें रोजाना जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। दस्तावेज, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट - और अधिकारियों की ओर से तैयार की ग

करनाल: धान घोटाले की जांच के - लिए गठित विशेष टीमें रोजाना जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। दस्तावेज, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट - और अधिकारियों की ओर से तैयार की गई फाइलों का मिलान किया जा रहा है। सरकारी धान और चावल के गबन में लोगों की भूमिका तय की जा रही है। अभी तक कई ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं मिले हैं, जिनका उल्लेख विभागीय रिकॉर्ड और विभिन्न रिपोटों में किया गया है।

यही कारण है कि पुलिस टीमों को लगातार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करना पड़ रहा है। जांच अधिकारी - पुराने रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, निरीक्षण रिपोर्ट, गेट पास, परिवहन दस्तावेज,मिलों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तथा विभागीय पत्राचार की प्रतियां जुटाने में लगे हुए हैं।

 
बर्खास्त कर्मचारी ने भी उगले कई नाम
मामले में बर्खास्त सहायक निरीक्षक से पूछताछ में कुछ नए नाम जांच के दायरे में आए हैं। कई राइस मिल मालिकों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार का कहना है कि पुलिस का जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। पुलिस की टीमें पड़ताल के लिए जितनी बार भी आती हैं उनको संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करवा दिया जाता है।


एसआईटी का मुख्य फोकस उन दस्तावेज पर है जिनके आधार पर विभिन्न राइस मिलों में सरकारी धान के भंडारण, मिलिंग और चावल जमा करवाने की प्रक्रिया दिखाई गई थी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन मिलों में रिकॉर्ड के अनुसार भारी मात्रा में धान और चावल मौजूद बताया गया था, वहां वास्तविक स्थिति क्या थी और विभागीय अधिकारियों ने किस आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। जांच एजेंसियां विभागीय दस्तावेज के साथ-साथ मौके पर तैयार की गई निरीक्षण रिपोटों का भी मिलान कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में कागजी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आ सकता है। इसी आधार पर यह तय होगा कि गबन की प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत अथवा जानबूझकर अनियमितताएं की गई।
 

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