जाट आरक्षण आंदोलनः साक्ष्य और गवाहों के अभाव में 7 आरोपी बरी, जाम लगाने और दंगा भड़काने के थे आरोपी

Edited By Isha, Updated: 10 Jan, 2026 11:31 AM

jat reservation movement seven accused acquitted due to lack of evidence

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिसार बाईपास चौक पर जाम लगाने व दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार सात आरोपियों को सीजेएम मोहम्मद सगीर की कोर्ट ने साक्ष्य व गवाहों के अभाव में बरी कर दिया। इनमें

रोहतक: जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिसार बाईपास चौक पर जाम लगाने व दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार सात आरोपियों को सीजेएम मोहम्मद सगीर की कोर्ट ने साक्ष्य व गवाहों के अभाव में बरी कर दिया। इनमें कुलदीप, जितेंद्र, सुनील उर्फ गोलू, जसबीर, सुनील उर्फ शीला, अशोक उर्फ सोनू व सुनील शामिल हैं। तीन आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है। वहीं, एक आरोपी की केस की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।

आरोपी पक्ष से केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता रजनेश मलिक ने बताया कि मौजूदा जमानत बांड रद्द कर दिए गए और 2000 रुपए के व्यक्तिगत बांड जमा किए गए। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 ए के अनुसार छह महीने की अवधि के लिए 20 हजार रुपए उपलब्ध कराए गए। अन्य आरोपियों में सुमित उर्फ भोलू के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी गई, जबकि सोमबीर, प्रदीप और जय भगवान को भगोड़ा घोषित कर किया गया है। इनकी सुनवाई अलग से होगी। 

यह था पूरा मामला

वर्ष 2016 में जाट आंदोलन चल रहा था, तभी सिटी थाना पुलिस ने कुलदीप, जितेंद्र, सुनील उर्फ गोलू, जसबीर, सुनील उर्फ शीला, अशोक उर्फ सोनू व सुनील सहित अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। पुलिस ने आरोप लगाए थे कि यह लोग हिसार बाईपास चौक पर सड़क जाम करने के साथ ही लोगों को दंगा भड़काने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

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