अब काॅमर्शियल बिल्डिंग में आसानी से बढ़ा सकेंगे Floor Area Ratio, इन इमारतों को एनवायरनमेंट क्लीयरेंस से छूट

Edited By Isha, Updated: 04 Jan, 2026 12:01 PM

it will be easier to increase the floor area ratio in commercial buildings

कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा सरकार ने हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए संशोधनों को लागू कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत अब काॅमर्शियल इमारतों में फ्लोर

चंडीगढ़: कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा सरकार ने हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 में किए गए संशोधनों को लागू कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत अब काॅमर्शियल इमारतों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को तय शुल्क के भुगतान पर बिना किसी रोक-टोक के बढ़ाया जा सकेगा। इसके साथ ही ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) की प्रक्रिया को भी सरल और समयबद्ध बनाया गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य रियल एस्टेट, औद्योगिक गतिविधियों और व्यापारिक निवेश को गति देना है। विभाग ने संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है।

अधिसूचना के अनुसार शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, डिपार्टमेंटल स्टोर, इंटीग्रेटेड कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, कार्यालय, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और गेस्ट हाउस जैसी विभिन्न श्रेणी की कामर्शियल इमारतों में अब अधिक एफएआर और ऊंचाई की अनुमति दी गई है। इसी तरह औद्योगिक इकाइयों को भी राहत दी गई है। जनरल इंडस्ट्रीज 150 प्रतिशत से अधिक, रेडीमेड कपड़ा और जूता निर्माण की इकाइयां 250 प्रतिशत से अधिक और डाटा सेंटर 500 प्रतिशत तक एफएआर तय शुल्क अदा कर खरीद सकेंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि एफएआर बढ़ोतरी के दौरान फायर सेफ्टी और पार्किंग से जुड़े सभी नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा ताकि सुरक्षा और शहरी प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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संशोधित प्रावधानों से पहले से निर्मित इमारतों को भी लाभ मिलेगा। 30 जून 2016 से पहले स्वीकृत परियोजनाएं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (आईडीसी) और एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) का भुगतान कर इंडस्ट्रियल, काॅमर्शियल, रिजॉर्ट और इंस्टीट्यूशनल उपयोग के लिए अतिरिक्त एफएआर का लाभ उठा सकेंगी।
वहीं, इसके बाद स्वीकृत इमारतों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 50 प्रतिशत तक एफएआर बढ़ाने की सुविधा दी गई है। अधिकारियों के अनुसार यह छूट कारोबार को आसान और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में दी गई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार सभी बिल्डिंग प्लान अप्रूवल और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए एक सार्वजनिक ऑनलाइन ई-रजिस्टर भी लॉन्च करेगी।


परियोजनाओं में देरी की समस्या दूर करने के लिए ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है। काफी जोखिम वाली इमारतों के लिए पैनल में शामिल थर्ड पार्टी आर्किटेक्ट और इंजीनियरों के माध्यम से निर्धारित समयसीमा में ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। वहीं, कम जोखिम वाली इमारतों जैसे प्लॉटेड रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी और कुछ औद्योगिक इकाइयों को न्यूनतम निर्माण शर्तों के तहत सेल्फ सर्टिफिकेशन के माध्यम से ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलेगा।

संशोधित बिल्डिंग कोड में प्रावधान किया कि ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (जीआरआईएचए) से प्रमाणित इमारतों को अलग से एन्वायरनमेंट क्लीयरेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। जीआरआईएचए भारत की राष्ट्रीय ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली है जो टिकाऊ डिजाइन, ऊर्जा दक्षता, जल प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों के उपयोग का मूल्यांकन करती है। इसका उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन संरक्षण को बढ़ावा देने वाली इमारतों को प्रोत्साहित करना है।

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