Edited By Manisha rana, Updated: 25 Jun, 2026 09:21 AM

हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरटीआई आवेदन पर तय समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत ‘मानित अस्वीकृति’ (Deemed Refusal) माना जाएगा।
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरटीआई आवेदन पर तय समय में कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो इसे सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत ‘मानित अस्वीकृति’ (Deemed Refusal) माना जाएगा। आयोग ने सरकारी विभागों में ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों की निगरानी की कमजोर व्यवस्था पर भी चिंता जताई है।
छह महीने बाद मिली जानकारी
यह मामला तुषार अरोरा द्वारा दायर एक अपील से जुड़ा है। अरोरा ने आरोप लगाया कि उन्होंने 16 अक्टूबर 2025 को हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) को आरटीआई आवेदन भेजा था, लेकिन उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने 21 नवंबर 2025 को पहली अपील भी दायर की। सुनवाई के दौरान एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित जानकारी 11 मई 2026 को उपलब्ध करा दी गई थी। अधिकारियों का कहना था कि आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आया था, लेकिन इसकी जानकारी संबंधित अधिकारी तक समय पर नहीं पहुंची।
आयोग ने जताई नाराजगी
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने कहा कि केवल यह तर्क देना पर्याप्त नहीं है कि अधिकारी ऑनलाइन पोर्टल से परिचित नहीं थे। उन्होंने कहा कि किसी आरटीआई आवेदन पर लंबे समय तक कार्रवाई न होना गंभीर लापरवाही है। आयोग ने यह भी बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ऑनलाइन दायर आरटीआई आवेदनों पर विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की। कई बार अधिकारियों को आवेदन की जानकारी तभी मिलती है, जब सूचना आयोग दूसरी अपील पर नोटिस जारी करता है।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
सूचना आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति हरियाणा के मुख्य सचिव को भेजी जाए। मुख्य सचिव के माध्यम से सभी विभागों के प्रशासनिक सचिवों और लोक सूचना अधिकारियों (एसपीआईओ) को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि ऑनलाइन प्राप्त आरटीआई आवेदनों की नियमित निगरानी और समय पर निस्तारण किया जाए।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसलिए विभागों को ऑनलाइन आवेदनों की अनदेखी करने के बजाय उनकी नियमित समीक्षा और समयबद्ध जवाब देने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।
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