Edited By Isha, Updated: 20 Jun, 2026 01:34 PM

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। यह फैसला उसके कार्यक्षेत्र में एक गर्भवती महिला की मृत्यु के मामले में आया है। अदालत ने कहा कि गर्भवती की पहचान और निगरानी करना कार्यकर्ता की मूल जिम्मेदारी है।
चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। यह फैसला उसके कार्यक्षेत्र में एक गर्भवती महिला की मृत्यु के मामले में आया है। अदालत ने कहा कि गर्भवती की पहचान और निगरानी करना कार्यकर्ता की मूल जिम्मेदारी है।
जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि कार्यकर्ता का स्पष्टीकरण उसकी कार्यशैली में गंभीर कमी दर्शाता है। यह मामला सेवा में अपेक्षित जिम्मेदारियों के निर्वहन में बड़ी चूक का उदाहरण है। जांच में सामने आया कि कार्यकर्ता ने महिला की गर्भावस्था की जानकारी विभाग को नहीं दी थी। उसने महिला की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित नहीं की थी। इसके बाद विभाग ने उसकी संविदात्मक सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
कार्यकर्ता का तर्क
कार्यकर्ता ने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती दी थी। उसने तर्क दिया कि महिला के हावभाव से उसे गर्भावस्था का पता नहीं चला। खंडपीठ ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया।