अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश: हरियाणा की टीम का बिहार में बड़ा एक्शन, भ्रूण लिंग जांच करते 4 गिरफ्तार

Edited By Isha, Updated: 21 Jun, 2026 08:22 PM

haryana team takes major action in bihar

झज्जर और चरखी दादरी की संयुक्त पीसीपीएनडीटी टीम ने बिहार के गया जिले के टिकारी कस्बे में भ्रूण लिंग जांच कराने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा है। डिकाय (फर्जी ग्राहक) आपरेशन के तहत एक अंडरकवर

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी): झज्जर और चरखी दादरी की संयुक्त पीसीपीएनडीटी टीम ने बिहार के गया जिले के टिकारी कस्बे में भ्रूण लिंग जांच कराने वाला अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा है। डिकाय (फर्जी ग्राहक) आपरेशन के तहत एक अंडरकवर गर्भवती महिला की मदद से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर राज इंटर स्कूल के समीप संचालित शिव शक्ति अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी की गई। मामले में हरियाणा के दो एजेंटों, अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक और सोनोलाजिस्ट बताने वाले एक व्यक्ति सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अल्ट्रासाउंड सेंटर को भी सील कर दिया गया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि चारों आरोपितों के खिलाफ पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। सक्षम प्राधिकारियों को जानकारी मिली थी कि झज्जर के छुछकवास गांव निवासी सुरेंद्र और राकेश यादव मिलकर झज्जर, दादरी और आसपास के इलाकों से गर्भवती महिलाओं को पैसों के बदले अवैध भ्रूण लिंग जांच के लिए बिहार ले जा रहे थे। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए जिला सक्षम प्राधिकारी (झज्जर) ने एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम में झज्जर से नोडल अधिकारी (पीसी एंड पीएनडीटी) डा. संदीप कुमार, डा. बसंत कुमार दुबे और विनोद कुमार तथा चरखी दादरी से डा. उदयभान और डा. संदीप शामिल थे।

योजना के तहत एक गर्भवती महिला को फर्जी ग्राहक बनाकर भेजा गया, जिसके साथ उसका पति बनने का नाटक करने वाला एक व्यक्ति भी था। आरोपितों ने 50 हजार रुपये में अवैध लिंग निर्धारण जांच करने की बात स्वीकार की। इसके बाद 19 जून की रात को डिकाय ग्राहक को छुछकवास बुलाया गया। फिर महिला को बिहार ले जाया गया। संयुक्त पीएनडीटी टीमें सुरक्षित दूरी से उस वाहन का पीछा कर रही थीं। टिकारी पहुंचने पर आरोपित महिला को 'शिव शक्ति अल्ट्रासाउंड सेंटर' ले गए, जो अवैध रूप से चलाया जा रहा था। वहां केंद्र संचालक रामाश्रय प्रसाद और खुद को सोनोलाजिस्ट बताने वाले गुलशन कुमार ने अल्ट्रासाउंड जांच के बाद बताया कि गर्भ में लड़का है।

डिकाय महिला के साथी से संकेत मिलते ही गया संयुक्त पीएनडीटी टीमों ने केंद्र पर छापा मार दिया। टीमों ने रामाश्रय प्रसाद, गुलशन कुमार, सुरेंद्र और राकेश यादव को पकड़ लिया और परिसर से एक अवैध अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त की। इसके बाद चारों आरोपितों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए टिकारी थाने को सौंप दिया गया। जांच के दौरान सामने आया कि एजेंटों के माध्यम से हरियाणा से गर्भवती महिलाओं को बिहार लाया जाता था और लिंग जांच के एवज में 50 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। अंडरकवर गर्भवती महिला के माध्यम से पूरे नेटवर्क की गतिविधियों की जानकारी मिली थी।
 
मुखबिर को मिलेगा एक लाख रुपये इनाम

स्वास्थ्य सचिव डा. मिश्रा ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय या जिला पीएनडीटी अधिकारियों को दें। प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण करना और करवाना, दोनों ही दंडनीय अपराध हैं, जिनमें तीन से पांच साल तक की कैद की सजा हो सकती है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ विश्वसनीय जानकारी देने वाले मुखबिरों को एक लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा और उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।

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