नियमितीकरण मामलों में हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देगी हरियाणा सरकार, एलपीए दाखिल करने में नहीं होनी चाहिए देरी; स्टे लेने का भी निर्देश

Edited By Harman, Updated: 27 Oct, 2026 05:56 PM

haryana government to challenge high court rulings on regularization cases

हरियाणा में कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े विभिन्न मामलों में हाईकोर्ट के फैसलों को सरकार चुनौती देने जा रही है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार तथा...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा में कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े विभिन्न मामलों में हाईकोर्ट के फैसलों को सरकार चुनौती देने जा रही है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार तथा बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशकों को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मानव संसाधन विभाग की ओर से सभी संबंधित विभागों को अपील (एलपीए) दाखिल करने और जरूरत पड़ने पर अदालत से फैसलों पर रोक लेने की कार्रवाई तत्काल शुरू करने को कहा गया है। यह निर्देश सीओसीपी नंबर 4776/2026, सीडब्ल्यूपी नंबर 5087/2026, ऋषि पाल बनाम अनुराग रस्तोगी एवं अन्य मामले के संदर्भ में जारी किए हैं। 

पत्र में कहा गया है कि नियमितीकरण से जुड़े मामलों में विभिन्न एलपीए दायर की गई हैं। ऐसे में 12 मई को सीडब्ल्यूपी नंबर 1770/2026 में दीपक कुमार एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले में एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देने के लिए प्राथमिकता से एलपीए दाखिल की जाए। इसके साथ ही 15 मई 2026 को एलपीए नंबर 1092/2026 में खंडपीठ द्वारा हरियाणा राज्य एवं अन्य बनाम सरोज रानी उर्फ सरोज रानी सैनी मामले में दिए गए फैसले तथा संबंधित मामलों को भी ध्यान में रखने को कहा गया है।

पत्र के अनुसार, नियमितीकरण से संबंधित इसी तरह के अन्य मामलों, एलपीए, सीओसीपी और दूसरी न्यायिक कार्यवाहियों में संबंधित विभाग तथ्यों, रिकार्ड और लागू नियमितीकरण नीतियों की सावधानीपूर्वक जांच करें। सक्षम प्राधिकारी और संबंधित विधि अधिकारी से परामर्श के बाद उचित कानूनी कदम उठाए जाएं। जहां जरूरी हो, वहां हाईकोर्ट से फैसलों के क्रियान्वयन पर रोक लेने के लिए भी आवेदन किया जाए।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित रिट याचिका में जवाब उपलब्ध सेवा रिकार्ड के आधार पर निचले स्तर के कार्यालयों में दाखिल किया गया था। इसलिए अब सभी संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि सेवा रिकार्ड, नीतिगत प्रविधानों, तथ्यों और कानूनी आधार की पूरी जांच कर उन्हें सक्षम प्राधिकारी तथा अदालत में पैरवी करने वाले वकील के समक्ष रखा जाए, ताकि प्रभावी ढंग से पक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

तुरंत भेजनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

चुनौती के आधार तैयार करते समय 15 मई 2026 के खंडपीठ के फैसले और संबंधित मामलों में दिए गए निर्णयों पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में उल्लेख है कि नियमितीकरण से जुड़े मामलों में एकल पीठ के पहले के निर्देशों में संशोधन किया गया था और सक्षम प्राधिकारी को संबंधित नीति तथा न्यायिक मिसालों के अनुरूप व्यक्तिगत मामलों की जांच करने को कहा गया था। मानव संसाधन विभाग ने पूरे मामले को अत्यंत जरूरी बताते हुए बिना देरी एलपीए दाखिल करने और उचित अंतरिम राहत मांगने की कार्रवाई शुरू करने को कहा है। संबंधित विभागों को की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भी तुरंत मानव संसाधन विभाग को भेजनी होगी।

 


 

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