Edited By Isha, Updated: 06 Jan, 2026 09:14 AM

हरियाणा के सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों में युवा प्रोफाइल को सशक्त बनाने तथा युवाओं
चंडीगढ़: हरियाणा के सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों में युवा प्रोफाइल को सशक्त बनाने तथा युवाओं में देश सेवा के प्रति जोश, जज्बा और अनुशासन विकसित करने के उद्देश्य से जून 2022 में अग्निपथ योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के अंतर्गत युवाओं को अग्निवीर के रूप में चार वर्ष की अवधि के लिए सेवा करने का अवसर प्रदान किया गया।
उन्होंने बताया कि अग्निपथ योजना के तहत पहले बैच की सेवा अवधि जुलाई 2026 में पूरी होनी है। इसके उपरांत अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा सरकार ने हरियाणा अग्निवीर नीति-2024 तैयार की है जिसे अगस्त 2026 से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। इस नीति के माध्यम से अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों एवं अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
राव नरबीर सिंह ने कहा कि सेना में सेवा उपरांत अग्निवीरों को रोजगार का सुरक्षा कवच देने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है। वर्ष 2022 23 में जल, थल एवं वायु सेना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 9 अग्निवीरों की की भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया 26,649
गया था। इसी क्रम में हरियाणा से वर्ष 2022-23 में 1,830 तथा वर्ष 2023-24 में 2,215 अग्निवीरों की भर्ती हुई। जनसंख्या एवं भौगोलिक दृष्टि से सीमित प्रतिनिधित्व के बावजूद हरियाणा के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा विशेष रूप से देखने को मिलता है।
यहां के युवा व्हाइट कॉलर नौकरियों की बजाय सेना की वर्दी को गर्व के साथ अपनाते हैं। यही कारण है कि देश की सेनाओं में हर दसवां सैनिक हरियाणा से होता है। हरियाणा सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों, अर्ध सैनिक बलों तथा उनके आश्रितों के कल्याण के लिए वर्ष 2016 में अलग से सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग का गठन किया है।
अक्तूबर 2014 से अब तक राज्य सरकार द्वारा 418 शहीदों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक आयोजित सेवा पखवाड़ा कार्यक्रमों के दौरान सेना की विभिन्न कोर एवं रेजीमेंट के अनुसार भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्मिलन समारोह आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त 1962, 1965, 1971 एवं कारगिल युद्ध के शहीदों के नाम पर विद्यालयों एवं अन्य संस्थानों का नामकरण करने के प्रस्ताव भी हरियाणा सरकार की नीति के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।