5 पहलवानों के प्रतिबंध पर आमने-सामने आए महासंघ; हरियाणा कुश्ती संघ बोला- 'सीधे बैन लगाना गलत, मौका मिलना चाहिए'

Edited By Isha, Updated: 07 Jun, 2026 12:51 PM

federations at odds over the ban on five wrestlers

उम्र छिपाकर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की ओर से पांच पहलवानों पर चार

चंडीगढ़:  उम्र छिपाकर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की ओर से पांच पहलवानों पर चार वर्ष का प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हरियाणा कुश्ती संघ इस मुद्दे को महासंघ के समक्ष उठाने की तैयारी में है।

हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष रमेश बोहर ने कहा कि युवा खिलाड़ियों पर सीधे प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। पहले भी ऐसे मामलों में खिलाड़ियों को संशोधित आयु निर्धारण (एज वेरिफिकेशन) के आधार पर दोबारा अवसर दिया जाता रहा है। इस मामले में भी नियमानुसार राहत पर विचार किया जाना चाहिए। हाल ही में डब्ल्यूएफआई ने एशियन अंडर-20 ट्रायल्स के स्वर्ण पदक विजेता दीपांशु समेत पांच पहलवानों पर जन्म प्रमाण पत्रों में कथित अनियमितता पाए जाने के बाद चार वर्ष का प्रतिबंध लगाया है।

प्रतिबंधित खिलाड़ियों में दीपांशु, तनुज आंतिल, बलजोत सिंह, निखिल दलाल और साकेत शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद दीपांशु को थाईलैंड में आयोजित होने वाली एशियन चैंपियनशिप की भारतीय टीम से भी बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह पवन बालाजी को टीम में शामिल किया है।

महासंघ ने सभी खिलाड़ियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 10 जून तक जवाब देने को कहा है। रमेश बोहर ने बताया कि संबंधित खिलाड़ियों के जन्म प्रमाण पत्र दिल्ली से जारी हुए हैं। इससे पहले भी 800 से अधिक पहलवानों के जन्म प्रमाण पत्रों में अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों में खिलाड़ियों को आयु सत्यापन के बाद दोबारा मौका देने का विकल्प उपलब्ध था।
 

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