Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 05 Jul, 2026 08:01 PM

मेरठ के वीर कोतवाल 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे जिन्होंने अपना जीव लोगों की मदद करने में लगा दिया और आजादी की लड़ाई में भी अहम भूमिका निभाई।
गुड़गांव, (ब्यूरो): मेरठ के वीर कोतवाल 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे जिन्होंने अपना जीव लोगों की मदद करने में लगा दिया और आजादी की लड़ाई में भी अहम भूमिका निभाई। यह बात भारतीय जनता पार्टी गुरुग्राम महानगर के किसान मोर्चा के महामंत्री धर्मेंद्र तंवर ने कही। वे धन सिंह गुर्जर के बलिदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद लोगों से बात कर रहे थे।
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धर्मेंद्र तंवर ने कहा कि मेरठ के वीर कोतवाल धन सिंह गुर्जर के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 31 जनवरी 2024 को शहीद कोतवाल की नई तस्वीर नई संसद सभा में लगाई गई। उन्होंने बताया कि मेरठ के कोतवाल धन सिंह गुर्जर का जन्म किसान जोधा सिंह और उनकी पत्नी मनभरी देवी के घर 27 नवंबर 1814 को ग्राम पांचली खुर्द में हुआ था। वह सबसे बड़े देशभक्त थे और उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ब्रिटिश हुकूमत में पुलिस में भर्ती होकर कोतवाल बन गए। कोतवाल बनकर उन्होंने मेरठ के लोगों की मदद की।
धर्मेंद्र तंवर ने बताया कि अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने 10 मई 1857 को मेरठ से क्रांति का आगाज कर दिया और सदर बाजार कोतवाली पर हमला बोलकर चर्बीयुक्त कारतूसों का विरोध करने वाले 85 भारतीय सैनिको सहित 840 कैदियों को छुड़वाया था और जेल में आग लगा दी थी। ब्रिटिश सरकार ने धन सिंह गुर्जर को दोषी ठहराया और 5इ जुलाई 1857 को मेरठ के चौराहे पर सबके सामने फांसी पर लठका दिया और मेरठ के गांव पांचली को तोप से उड़ा दिया था।
इस दौरान सैकड़ों गुर्जर किसान माने गए और जो बचे उन्हें गिरफ्तार कर दशहरे के दिन फांसी लगा दी गई। तब से मेरठ के गांव पांचली में दशहरा नहीं मनाया जाता। और 4 जुलाई को मेरठ के कोतवाल धन सिंह गुर्जर के बलिदान दिवस के रूप मनाया जाता है। धर्मेंद्र तंवर ने कहा कि हमें धन सिंह गुर्जर के बलिदान को सदैव याद रखते हुए उनके बताए गए रास्तों पर चलना होगा।