जाति भेदभाव की 150 साल पुरानी कुप्रथा टूटी, कई थानों से पहुंचा पुलिस बल, अब इतिहास में नाम दर्ज

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 13 Nov, 2025 09:47 PM

150 year old evil practice of caste discrimination was broken

हरियाणा के इस गांव में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला।

रेवाड़ी (महेंद्र भारती) : रेवाड़ी जिले के बावल क्षेत्र के गांव खेड़ी डालू सिंह में गुरुवार को सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। करीब 150 साल पुरानी कुप्रथा उस समय टूटी जब अनुसूचित जाति समुदाय के युवक अंकित की बारात पहली बार घोड़ी पर निकली। बताया जा रहा है कि अब तक गांव में इस समाज के किसी युवक की घुड़चढ़ी नहीं हो पाई थी।

दूल्हे के परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए रेवाड़ी पुलिस, प्रशासन और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से सुरक्षा की मांग की थी। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई थानों का पुलिस बल और ड्यूटी मजिस्ट्रेट मौके पर तैनात किया। भारी सुरक्षा के बीच बारात शांतिपूर्वक गांव से रवाना हुई और किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ।

 सब कुछ शांति से संपन्न हुआ- दुल्हा

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पशुपालन विभाग में कार्यरत दूल्हे अंकित ने बताया कि ने बताया कि यह परंपरा गांव की स्थापना से चली आ रही थी और कई प्रयासों के बावजूद इसे कोई बदल नहीं सका। उन्होंने कहा कि प्रशासन और मानवाधिकार आयोग के सहयोग से सब कुछ शांति से संपन्न हुआ।

किसी तरह का तनाव नहीं हुआ- डीएसपी

गांव के सरपंच प्रतिनिधि नेपाल सिंह और डीएसपी सुरेंद्र श्योराण ने भी पुष्टि की कि गांव में किसी तरह का तनाव नहीं हुआ। बावल डीएसपी सुरेंद्र श्योराण ने भी पुष्टि की कि गांव में कोई तनाव नहीं था। पुलिस सिर्फ एहतियातन मौजूद थी। बताया जा रहा है कि यह दिन गांव खेड़ी डालू सिंह और रेवाड़ी जिले के लिए इतिहास में दर्ज हो गया जब 150 साल की परंपरा बदलकर समानता और सम्मान की नई मिसाल कायम हुई।

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