25 करोड़ के मोटर एक्सीडेंट इंश्योरेंस धोखाधड़ी का किया खुलासा

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 28 Nov, 2025 06:59 PM

motor accident insurance fraud of rs 25 crore exposed

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, CID क्राइम और रेलवे, गुजरात राज्य के नेतृत्व में, SIT ने अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया. जांच में पुष्टि हुई कि असल में वह सह-चालक दुर्घटना के समय अकेले गाड़ी चला रहा था.

गुड़गांव ब्यूरो :  प्राइवेट जनरल इंश्योरेंस कंपनियों में से एक बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने थर्ड पार्टी क्षतिपूर्ति क्लेम के आधार पर 25 करोड़ रुपये के मोटर एक्सीडेंट इंश्योरेंस धोखाधड़ी का खुलासा किया है. इस धोखाधड़ी को गलत FIR और भ्रामक दस्तावेज़ों के माध्यम से मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MTT), भुज को सबमिट किया गया था. यह केस भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत साणंद पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से शुरू हुआ था. यह शिकायत कथित चालक द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसने दावा किया कि वह महिंद्रा ज़ायलो चला रहा था और अचानक एक कुत्ता सड़क पर सामने आ गया, जिसके कारण वाहन पलट गया. उसने आरोप लगाया कि उसके बगल में बैठे सह-चालक को गंभीर चोटें आईं और उसे साणंद सरकारी हॉस्पिटल में मृत घोषित कर दिया गया।

 

इसके बाद मृतक के कानूनी वारिसों ने भुज में MTC के समक्ष 25 करोड़ रुपये का मुआवज़ा क्लेम दायर किया. बजाज जनरल इंश्योरेंस को कोर्ट के समन प्राप्त हुए और आंतरिक जांच शुरू की गई . कंपनी ने FIR, चार्जशीट, पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल और पंचनामा रिपोर्ट्स और वाहन के डॉक्यूमेंट प्राप्त किए. कंपनी को FIR और सहायक डॉक्यूमेंट संदिग्ध लगे और उनसे यह संकेत मिला कि ये धोखाधड़ी करने की तैयारी के साथ किया गया प्रयास था. न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता को समझते हुए, बजाज जनरल इंश्योरेंस ने माननीय गुजरात उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दुर्घटना को प्राथमिक रूप से संदिग्ध माना जा रहा है और फिर मामले की दोबारा जांच के लिए CID क्राइम ब्रांच के तहत एक विशेष जांच टीम (SIT) नियुक्त की गई. मोटर एक्सीडेंट क्लेम याचिका में सभी कार्यवाहियों को SIT की रिपोर्ट प्राप्त होने तक स्थगित कर दिया गया।

 

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, CID क्राइम और रेलवे, गुजरात राज्य के नेतृत्व में, SIT ने अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया. जांच में पुष्टि हुई कि असल में वह सह-चालक दुर्घटना के समय अकेले गाड़ी चला रहा था. कथित चालक ने जानबूझकर झूठी FIR दर्ज की, गवाहों को गुमराह किया और धोखाधड़ी भरे दावे का समर्थन करने के लिए जाली सबूत प्रस्तुत किए. वाहन के मालिक ने भी इंश्योरेंस ले रखा था और उन्होंने भी प्रधान सिविल न्यायाधीश, मेहसाणा के समक्ष रेग्युलर डैमेज मिसलेनियस के माध्यम से अपने वाहन के नुकसान का क्लेम करने का प्रयास किया, हालांकि यह क्लेम पहले ही अस्वीकार किया जा चुका था. सत्यापित सबूतों के आधार पर, बजाज जनरल इंश्योरेंस ने कथित चालक और इंश्योर्ड व्यक्ति दोनों के खिलाफ साणंद पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की, जिसमें साजिश, सबूतों का निर्माण और धोखाधड़ी का प्रयास का आरोप शामिल था.

 

बजाज जनरल इंश्योरेंस इंश्योरेंस ने धोखाधड़ी पर अपनी ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी को लगातार बनाए रखा है. कंपनी धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों की पहचान करने, उनकी जांच करने और उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. सभी पॉलिसीधारकों से अनुरोध है कि सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की तुरंत रिपोर्ट करें. इंश्योरेंस धोखाधड़ी न केवल बिज़नेस को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ईमानदार कस्टमर और पूरी कम्युनिटी को भी नुकसान पहुंचाती है. इस केस में बताया गया है कि किसी भी पृष्ठभूमि का व्यक्ति धोखाधड़ी में शामिल हो सकता है. बजाज जनरल इंश्योरेंस न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायालयों के साथ काम करना जारी रखेगा। 

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