VIDEO: ट्रैफिक जाम खुलवाने के लिए खुद सडक़ पर उतरे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 17 Jan, 2026 08:20 PM

राजनीति के क्षेत्र में जहां किसी भी नेता को उनकी नीतियां जनप्रिय बनाती हैं तो वहीं नेता का आचरण और व्यवहार भी उनकी राजनीति में उनके मूल्यों को दर्शाता है। मनोहर लाल खट्टर भी उन्हीं राजनेताओं की फेहरिस्त में आते हैं जिनका काम करने का अंदाज ही उन्हें...

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): राजनीति के क्षेत्र में जहां किसी भी नेता को उनकी नीतियां जनप्रिय बनाती हैं तो वहीं नेता का आचरण और व्यवहार भी उनकी राजनीति में उनके मूल्यों को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी उन्हीं राजनेताओं की फेहरिस्त में आते हैं जिनका काम करने का अंदाज ही उन्हें औरों से भिन्न बनाता है। यूं तो अपनी प्रायोगिक नीतियों के बूते कई बड़े उदाहरण प्रस्तुत कर चुके मनोहर लाल खट्टर ने कई मर्तबा अपनी सादगी और संजीदगी को दर्शाया है लेकिन कई वाक्य उनके साथ ऐसे भी घटित हुए जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा साबित हुए। शनिवार को भी दिल्ली में कुछ ऐसा घटित हुआ जिसे देखकर हर कोई खट्टर का मुरीद हुए बिना नहीं रह सका।

आलम ये था कि जब वे अपने आवास से किसी बैठक में शामिल होने जा रहे थे तो रास्ते में एक स्थान पर ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ी हुई थी और इस कारण आम जनमानस को काफी दिक्कतें हो रही थी। लोगों को परेशानी में उलझा देख केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल न केवल खुद अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ ट्रैफिक को कंट्रोल करने में जुट गए बल्कि देखते ही देखते उस भारी जाम को भी हटाते हुए ट्रैफिक को सुचारू कर दिया। जब दूसरे वाहन चालकों को इस बात का भेद लगा कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने वाले खुद केंद्रीय मंत्री हैं तो सभी ने उनके इस प्रयास की सराहना भी की। खास बात ये भी है कि ऐसा कोई पहली बार नहीं था बल्कि इससे पूर्व भी खट्टर मनोहरी प्रयास करते हुए अनेक बार एक नागरिक के कत्र्तव्य की बानगी प्रस्तुत कर चुके हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सादगी और संजीदगी की मिसाल साबित हो रहे हैं।

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पहले भी सेवाभाव के प्रस्तुत कर चुके हैं अनेक उदाहरण

गौरतलब है कि 26 अक्तूबर 2014 को मनोहर लाल खट्टर पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे और उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद नए प्रयोग करते हुए साहसिक फैसले लेकर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया तो अपनी अनूठी कार्यशैली से भी एक खास पहचान बनाई। समय-समय पर उनका मानवीय सेवाभाव वाला आचरण नजर आता रहा है। एक समय जब वे मुख्यमंत्री थे और गुरुग्राम में किसी कार्य से जा रहे थे तो उन्होंने एक एम्बुलैंस को जाम में फंसा देखा था जिसमें गंभीर रूप से बीमार मरीज था। तब मनोहर लाल खट्टर ने अपना काफिला रुकवाया और जाम मेें से एम्बुलैंस गाड़ी को तुरंत बाहर निकलवाया। सियासी पर्यवेक्षकों के साथ साथ भाजपा कार्यकत्र्ता व आम लोग भी मानते हैं कि मनोहर लाल खट्टर की जीवनशैली सहज और सरल है। उनकी शराफत, साफगोई और सादगी की अक्सर उनके विरोधी भी प्रशंसा करते हैं। हरियाणा की राजनीति में अक्सर यह चर्चा रहती है कि मनोहर लाल वास्तव में एक ईमानदार और सिद्धांतवादी राजनेता साबित हुए हैं जो न केवल वी.आई.पी. कल्चर से तो हमेशा दूर रहते ही हैं वहीं वे ऐसे मुख्यमंत्री भी साबित हुए हैं जो मुख्यमंत्री का पद छोडऩे के बाद एक अटैची लेकर ही मुख्यमंत्री आवास से बाहर आ गए और साढ़े 9 वर्षांे में बतौर मुख्यमंत्री उन्हें मिले बेशकीमती उपहार भी सरकारी खजाने में दे दिए तो अपनी पुश्तैनी संपत्ति भी दान में दे दी। एक तरह से यह भी चर्चा आम होती है कि हरियाणा की राजनीति के तीन बड़े लाल चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल की तरह हरियाणा का यह चौथा लाल मनोहर लाल भी सादगीप्रिय व्यक्ति है। सादा भोजन और सादा लिबास ही इन्हें पसंद है।
 
संघ से मिले हैं अनुशासन व संस्कार

खास बात ये है कि एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनोहर लाल का परिवार 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर रोहतक जिले के गांव निदाना में बस गया और उसके बाद रोहतक के गांव बनियानी में आ गए। दसवीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद मनोहर लाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद वे सदर बाजार में दुकान करने लगे। सादगी पसंद मनोहर लाल शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित थे। 1977 में महज 24 साल की उम्र में वे संघ से जुड़ गए। संघ की सदस्यता के बाद 27 साल की उम्र वे संघ के बड़े प्रचारक बने। 1994 में उन्हें भाजपा में शामिल कर लिया। संघ व पार्टी से जुडऩे के बाद उन्होंने संगठन में अनेक पदों पर काम किया और उन्हें नरेंद्र मोदी के साथ भी काम करने का मौका मिला। वे पार्टी के प्रदेश महासचिव भी रहे। इसीलिए वे नरेंद्र मोदी के नजदीकी व विश्वासपात्रों में माने जाते हैं। खट्टर का आरम्भिक जीवन गांव देहात के माहौल में गुजरा है। बाद में उनके परिवार ने खेती करने लगा। अनुशासन, संस्कार एवं सादगी जैसे गुण उन्हें अपने परिवार एवं संघ में काम करते हुए मिले और इसीलिए वे जमीन से जुड़े हुए नेता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।

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