सेवानिवृत्ति के अढ़ाई साल के बाद भी नहीं मिली ग्रैच्युटी व बकाया वेतन

Edited By Shivam, Updated: 05 Oct, 2019 09:58 AM

gratuity and unpaid salary not received even after two and a half years

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार प्रश्न चिन्ह लगते रहते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा गुरु नानक खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल से सेवानिवृत्त हुए अध्यापक रमेश कुमार महेश्वरी को सेवानिवृत्ति के अढ़ाई वर्ष बाद भी वे लाभ नहीं मिले जो शिक्षा विभाग से...

यमुनानगर (त्यागी): शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार प्रश्न चिन्ह लगते रहते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा गुरु नानक खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल से सेवानिवृत्त हुए अध्यापक रमेश कुमार महेश्वरी को सेवानिवृत्ति के अढ़ाई वर्ष बाद भी वे लाभ नहीं मिले जो शिक्षा विभाग से उन्हें मिलने चाहिए थे। इसके लिए वे एक लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। अधिकारियों के पास तो उन्होंने कई बार पत्राचार किया व कई बार व्यक्तिगत रूप से भी मिले। हर ओर से उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, कार्रवाई नहीं हुई।

महेश्वरी का कहना है कि अपने ही पैसे के लिए उन्हें पिछले अढ़ाई साल से विभाग के धक्के खाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब ४ लाख रुपए उनके भी रुके हुए हैं जो उन्हें मिलने हैं। सब ओर से निराश होने के बाद अब उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उनका कहना है वे जनवरी-१९८७ से फरवरी-२०१७ तक लगभग ३० वर्ष तक श्री गुरु नानक खालसा सीनियर सैकेंडरी स्कूल में बतौर शिक्षक अपनी सेवाएं देते रहे हैं। सरकार द्वारा अनुमोदित पद पर रहते हुए उन्होंने अपनी सेवाएं दी। वर्ष-२०१७ में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपनी ग्रैच्युटी व बकाया रुके वेतन के बारे में मांग की लेकिन उन्हें नहीं मिला।

उनको सेवानिवृत्त हुए करीब अढ़ाई वर्ष हो गए हैं लेकिन अभी तक संशोधित ग्रैच्युटी का बकाया २ लाख ४३ हजार १४४ रुपए अभी तक नहीं दिया गया है। इसके साथ ही ७वें वेतन आयोग के अनुसार वेतन का बकाया जोकि लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक बनता है वह भी अभी तक नहीं दिया गया है।


इस संबंध में उन्होंने कई बार जिला शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को भी लिखा। वहां से उन्हें केवल आश्वासन मिले। उन्होंने बताया कि उनकी बकाया राशि न मिलने के कारण उनकी आॢथक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार स्कूल प्रशासन को भी लिखा लेकिन स्कूल प्रशासन से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। हालांकि एक बार वे मुख्यमंत्री को सी.एम. विंडो के माध्यम से अपनी शिकायत दे चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।

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