Edited By Yakeen Kumar, Updated: 14 Nov, 2025 08:49 PM

यहां लगभग हर घर से एक फुटबॉलर निकल रही है और 200 से अधिक लड़कियां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
भिवानी : भिवानी जिले का अलखपुरा गांव आज ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से पूरे देश में पहचाना जाता है। यहां लगभग हर घर से एक फुटबॉलर निकल रही है और 200 से अधिक लड़कियां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। गांव की अनोखी खेल संस्कृति ने इस छोटे से इलाके को महिला फुटबॉल का मजबूत गढ़ बना दिया है।
गांव में लड़कियों के खेल के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं। नियमित अभ्यास के लिए मैदान तैयार है और बाहरी कोच भी उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। माता-पिता बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन देते हैं, जिसके चलते रोजाना सैकड़ों लड़कियां मैदान में प्रैक्टिस करती दिखाई देती हैं। इन खिलाड़ियों का सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान संजू यादव हैं, जो इसी गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं।
खेल विभाग ने नियुक्त की महिला कोच
शुरुआत में सुविधाओं की कमी जरूर थी, लेकिन समय के साथ हरियाणा खेल विभाग ने यहां महिला कोच सोनिका बिजारणिया को नियुक्त किया। सोनिका का कहना है कि उनके आने से खिलाड़ियों की तकनीक में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि 2014 से अब तक अंडर-14, 17, 19 और सीनियर स्तर के हर आयु वर्ग में भिवानी जिला पहला स्थान हासिल कर रहा है।
सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं कई खिलाड़ी

अलखपुरा की इन बेटियों की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। 2014, 2015 और 2016 में सुभ्रोतो कप जीतने वाली कई खिलाड़ी आज 50 से अधिक सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। भारतीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान संजू यादव के पदचिह्नों पर चलते हुए यह गांव नई फुटबॉल प्रतिभाओं का केंद्र बना हुआ है और देशभर में महिला खेलों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
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