सरकार के प्रस्ताव को SKM पंजाब ने सिरे से ठुकराया, MSP गारंटी कानून से गुमराह करने का लगाया आरोप

Edited By Saurabh Pal, Updated: 19 Feb, 2024 06:32 PM

skm rejected the proposal of union ministers

किसान आंदोलन को लेकर बड़ी खबर आ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया है। गौरतलब है कि बीते दिन संयुक्त किसान मोर्चा ने लुधियाना में एक बैठक कर शंभू बॉर्डर पर न जाकर अलग से आंदोलन की बात कही थी...

डेस्कः किसान आंदोलन को लेकर बड़ी खबर आ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया है। गौरतलब है कि बीते दिन संयुक्त किसान मोर्चा ने लुधियाना में एक बैठक कर शंभू बॉर्डर पर न जाकर अलग से आंदोलन की बात कही थी। इसके साथ दूसरे रास्ते से दिल्ली कूच की बात कही थी। वहीं बता दें कि यह संयुक्त किसान मोर्चा अभी किसी भी आंदोलन में शामिल नहीं है, लेकिन धरनारत किसानों की मांगों का समर्थन किया है। शंभू बॉर्डर पर जो किसान आंदोलनरत हैं वे सभी संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक से हैं। 

एसकेएम गैर राजनीतिक प्रस्ताव पर कर रहा विचार

वहीं बता दें कि शंभू बॉर्डर पर डटे संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक की लीडशिप अभी केंद्रीय मंत्रियों के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है। उन्होंने चंडीगढ़ में हुई चौथी बैठक के बाद प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 2 दिन का समय मांगा है। वह अपना फैसला 21 तारीख बताएंगे। उन्होंने कहा कि अगर सहमति बनी तो ठीक नहीं तो 21 को किसान शांतिपूर्वक दिल्ली कूच करेंगे।

'खरीद व एमएसपी नहीं दे सकते तो जनता को सीधा बताएं'

अब एसकेएम ने चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्रियों के मक्का, कपास, अरहर/तूर, मसूर और उड़द  की  फसलों को A 2+FL+50% एमएसपी पर खरीदने और खेती में फसल चक्र विधि (विविधीकरण) को बढ़ावा देने के लिए किसानों के साथ पांच साल का अनुबंध करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। एसकेएम  का मानना है कि केंद्रीय मंत्रियों का प्रस्ताव खरीद की गारंटी और सभी फसलों पर C2+50% एमएसपी की गारंटी की मांग से किसानों का ध्यान भटका रहा है। जिसका वादा 2014 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किया था। इसके साथ ही मूल रूप से स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा ये सिफारिशें की गईं थीं। एसकेएम ने घोषणा की कि गारंटीकृत खरीद वाली सभी फसलों के लिए एमएसपी C2+50% से नीचे कुछ भी भारत के किसानों को स्वीकार्य नहीं है। अगर मोदी सरकार बीजेपी के वादे को लागू नहीं कर पा रही है तो प्रधानमंत्री ईमानदारी से जनता को बताएं।

बैठकों पर एसकेएम ने उठाए सवाल

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री यह स्पष्ट करने को तैयार नहीं हैं कि उनके द्वारा प्रस्तावित एमएसपी A2+FL+50% पर आधारित है या C2+50% पर है। चर्चा में कोई पारदर्शिता नहीं है जबकि चार बार चर्चा हो चुकी है। यह दिल्ली सीमाओं पर 2020-21 के ऐतिहासिक किसान संघर्ष के दौरान एसकेएम द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक संस्कृति के खिलाफ है। उन वार्ताओं के दौरान, एसकेएम द्वारा चर्चा के प्रत्येक बिंदु और किसानों के रुख को सार्वजनिक जानकारी के लिए रखा गया था।

किसानों की मूल मांगें

एसकेएम ने केंद्रीय मंत्रियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मोदी सरकार ऋण माफी, बिजली का निजीकरण नहीं करने, व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र की फसल बीमा योजना, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 10000 रुपये मासिक पेंशन, अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और मुकदमा चलाने की मांगों पर चुप क्यों है। टेनी, केंद्रीय राज्य मंत्री (गृह) अन्य लोगों के अलावा, लखीमपुर खीरी में किसानों के नरसंहार के मुख्य साजिशकर्ता हैं।

भाजपा और एनडीए का एसकेएम करेगा विरोध

किसानों के संघर्ष को तेज करने के लिए, मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों और कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार को जनता के बीच उजागर करने के लिए, पंजाब की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों पर क्रूर दमन को समाप्त करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र की तानाशाही मानसिकता का विरोध करने की मांग के साथ एसकेएम ने पूरे भारत में बीजेपी और एनडीए के एमपी के निर्वाचन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, बैठकें मशाल जुलूस आयोजित करने का आह्वान किया है।

एसकेएम ने सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों और हरियाणा के भीतर किसान कार्यकर्ताओं पर क्रूर हमले करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली हरियाणा राज्य सरकार की कड़ी निंदा की। किसानों पर गोलियों का इस्तेमाल किया गया और क्रूर लाठीचार्ज और पैलेट फायरिंग में तीन किसानों की आंखों की रोशनी चली गई। हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन किसानों और किसान नेताओं के वाहनों और मोटरसाइकिलों को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जो बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों से मिलने गए थे। 21, 22 फरवरी को होने वाली एनसीसी और एसकेएम की आम सभा की बैठक में स्थिति का जायजा लिया जाएगा और सभी मांगें पूरी होने तक संघर्ष को तेज करने के लिए भविष्य की कार्रवाई की योजना बनाई जाएगी।

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