कोर्ट में पेश फाइल में आरोपियों के 31 ब्लैंक पेपर पर मिले हस्ताक्षर, कोर्ट ने लिया संज्ञान, एसीपी ने मांगी माफी, जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 20 Aug, 2026 06:21 PM

signatures of accused were found blank sheets in case file

साइबर क्राइम थाना मानेसर में दर्ज ठगी के एक मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच प्रणाली की बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। अदालत में पेश की गई केस फाइल में आरोपियों के हस्ताक्षर (साइन) किए हुए 31 कोरे कागज लगे पाए गए।

गुड़गांव, (ब्यूरो):  साइबर क्राइम थाना मानेसर में दर्ज ठगी के एक मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच प्रणाली की बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। अदालत में पेश की गई केस फाइल में आरोपियों के हस्ताक्षर (साइन) किए हुए 31 कोरे कागज लगे पाए गए। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने जवाबदेही तय की, जिसके बाद एसीपी साइबर गौरव फौगाट को अदालत में हलफनामा दाखिल कर लिखित में खेद जताना पड़ा।

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जानकारी के अनुसार मामला 13 मई 2025 का है, जब पीड़ित मनोज यादव ने पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर 10 लाख 86 हजार 617 रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से डेढ़ लाख रुपये आरोपी रितेश कुमार के खाते में पहुंचे थे। पुलिस ने रितेश को 21 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। हाल ही में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत में आरोपी रितेश कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी।

 

अदालत ने जब पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस फाइल (केस डायरी) का अवलोकन किया, तो उसमें गंभीर प्रशासनिक खामियां मिलीं। फाइल में बिना किसी लिखावट के आरोपियों महेंद्र कुमार मीणा, पवन, भवानी, राहुल कुमार, विशाल मौर्य, अरविंद कुमार और नथानी भावेश भाई के हस्ताक्षर किए हुए 31 कोरे पन्ने लगे थे। इसके अलावा, पूरी पुलिस फाइल में पृष्ठ संख्या भी दर्ज नहीं थी। अदालत ने इसे निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन माना और एसीपी साइबर को व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया।

 

एसीपी साइबर गौरव फौगाट ने अदालत में हलफनामा पेश कर इन कमियों को स्वीकार किया और इसे बेहद गंभीर चूक माना। उन्होंने कोर्ट के समक्ष गहरा खेद प्रकट करते हुए कहा कि संबंधित जांच अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि पुलिस जांच में खाली हस्ताक्षरित कागज लेने की इस गलत प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। साथ ही, डीसीपी मुख्यालय की ओर से 14 अगस्त को ही जिले के सभी थाना प्रभारियों को केस फाइलों में अनिवार्य रूप से प्रॉपर पेज मार्किंग करने का सर्कुलर जारी कर दिया गया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन की ओर से पेश हलफनामे, मामले के तथ्यों और ठगी की गंभीरता को देखते हुए आरोपी रितेश कुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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