'झूले प्रतिबंधित थे तो क्यों अनुमति दी गई', प्रशासन पर SHO जगदीश के परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

Edited By Deepak Kumar, Updated: 08 Feb, 2026 12:47 PM

sho jagdish family raised serious questions on the administration

सूरजकुंड का अंतरराष्ट्रीय मेला, जो अपनी रौनक के लिए जाना जाता है, आज एक खाकी वर्दी वाले की शहादत और परिवार के आंसुओं का गवाह बन गया है।

फरीदाबाद (अनिल राठी):- सूरजकुंड का अंतरराष्ट्रीय मेला, जो अपनी रौनक के लिए जाना जाता है, आज एक खाकी वर्दी वाले की शहादत और परिवार के आंसुओं का गवाह बन गया है। 7 फरवरी को हुए झूला हादसे ने न केवल 12 लोगों को जख्मी किया, बल्कि एक जांबाज पुलिस अधिकारी, इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को हमसे छीन लिया। प्रमोशन पाकर हाल ही में एसएचओ बने जगदीश प्रसाद लोगों की जान बचाने के लिए मौत के झूले की तरफ दौड़े थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि दूसरों को जिंदगी देते-देते उनकी अपनी सांसें थम जाएंगी। आज शहीद का परिवार मेला प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहा है।

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परिजनों का साफ आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि मेला प्राधिकरण की घोर लापरवाही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उधर, पर्यटन मंत्री और डीजीपी हरियाणा ने इस घटना पर संवेदनाएं तो व्यक्त की हैं, लेकिन क्या संवेदनाएं उस पिता को वापस ला पाएंगी जिसने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी?
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आपको बता दें, महज एक महीने पहले ही जगदीश प्रसाद ने अपनी बेटी के हाथ पीले किए थे। घर में अभी शादी की खुशियां खत्म भी नहीं हुई थीं कि पिता की मौत की खबर ने सबको सदमें में डाल दिया है। अब परिजन मेला प्राधिकरण पर सीधे सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब पहले भी ऐसे हादसे हुए थे और झूले प्रतिबंधित थे, तो फिर दोबारा सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर झूले शुरू करने की अनुमति क्यों दी गई?

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