किलोमीटर स्कीम योजना : निजी बसों के सहारे रोडवेज की कमाई बढ़ी

Edited By vinod kumar, Updated: 05 Feb, 2020 11:47 AM

roadways earnings increased with the help of private buses

रोडवेज कर्मचारी यूनियंस के विरोध के बीच सोनीपत डिपो में शामिल हुई किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसें अब तक विभाग के लिए घाटे का सौदा साबित नहीं हुई हैं। गत जनवरी के रिकार्ड के अनुसार सोनीपत के अंतर्गत शामिल बसों ने अब तक 27 रुपए 93 पैसे प्रति किलोमीटर...

सोनीपत(स.ह.): रोडवेज कर्मचारी यूनियंस के विरोध के बीच सोनीपत डिपो में शामिल हुई किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसें अब तक विभाग के लिए घाटे का सौदा साबित नहीं हुई हैं। गत जनवरी के रिकार्ड के अनुसार सोनीपत के अंतर्गत शामिल बसों ने अब तक 27 रुपए 93 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से कमाई की है, जबकि किलोमीटर स्कीम योजना के तहत रोडवेज को निजी बस संचालकों को 26 रुपए 92 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से पेमैंट अदा करनी है। 

गत 11 जनवरी को सोनीपत डिपो में किलोमीटर स्कीम योजना के तहत 6 निजी बसों को शामिल किया था। इसके बाद बसों की किल्लत झेल रहे सोनीपत के बस यात्रियों को हल्की राहत मिली थी। शुरूआत में आशंका जताई जा रही थी कि उक्त बसों के सोनीपत बेड़े में शामिल होने से रोडवेज विभाग पर बोझ बढ़ेगा। 

किलोमीटर स्कीम के तहत शामिल की बसों में ड्राइवर निजी बस संचालक नियुक्त होता है, जबकि परिचालक रोडवेज विभाग का होता है परंतु जनवरी में निजी बसों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।

सोनीपत में 15 हुई निजी बसों की संख्या
सोनीपत डिपो में गत जनवरी में शुरूआत में किलोमीटर स्कीम के तहत 6 बसों को शामिल किया था। इनमें से 3 बसों को गोहाना डिपो में भेज दिया था, वहीं 3 बसें सोनीपत डिपो में तैनात की थीं परंतु अब बसों की संख्या 15 हो चुकी है। इसमें से 5 बसें गोहाना डिपो में तैनात की हैं। नई बसों को लम्बे रूटों पर चलाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही डिपो में और नई बसें शामिल हो सकती हैं। ऐसे में बसों की किल्लत झेल रहे बस यात्रियों को राहत मिल सकती है।

सफर तय करने में लगा रहीं अधिक समय
नई बसों के शामिल होने से भले ही यात्रियों को बसों की किल्लत से हल्की निजात मिली हो परंतु किलोमीटर स्कीम के तहत शामिल की बसों में सफर करने वाले यात्रियों को निर्धारित स्थान पर पहुंचने में रोडवेज बसों की तुलना में अधिक समय लग रहा है। इसकी वजह से बस यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सोनीपत से चंडीगढ़ तक का सफर रोडवेज की बसें जहां 4 से 5 घंटे में पूरा कर देती हैं, नई बसों में सफर करने वाले यात्रियों की शिकायत है कि इनमें चंडीगढ़ तक पहुंचने में 6 से 7 घंटे लग रहे हैं।

पुरानी होती जा रही रोडवेज की बसों से लगातार घट रही थी विभाग की कमाई
सोनीपत में कुछ सालों पहले तक बसों की संख्या 220 से अधिक थी। इनमें से सोनीपत डिपो में करीब 160 से 170 बसें तैनात रहती थीं परंतु कुछ सालों से विभाग को नई बसें न मिलने और पुरानी बसों के लगातार कंडम घोषित होने की वजह से सोनीपत डिपो में बसों की संख्या घटकर करीब 120 रह गई थी। पुरानी बसों की वजह से रोडवेज की कमाई पर भी असर पड़ रहा था। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसम्बर, 2019 में रोडवेज की बसों ने प्रति किलोमीटर औसतन 24 रुपए 84 पैसे की कमाई की थी। नई बसें शामिल होने से रोडवेज की कमाई में भी सुधार हो सकता है।

राहुल जैन, रोडवेज जी.एम., सोनीपत ने कहा कि  किलोमीटर स्कीम के तहत अब तक 15 बसें डिपो में शामिल की जा चुकी हैं। इससे बसों की कमी कुछ हद तक दूर हुई है। अब तक बसों का संचालन ठीक ढंग से हो रहा है। जल्द ही रोडवेज विभाग 15 मिनी बसों को बेड़े में शामिल करेगा जिसके बाद लोकल रूटों पर यात्रियों की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

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