रेनू भाटिया के बयान पर प्रदर्शन; नर्सिंग स्टाफ बोला- 'हम दोषी नहीं हमें बदनाम मत करो असली जिम्मेदारों को सामने लाओ'

Edited By Krishan Rana, Updated: 09 Jun, 2026 05:47 PM

protest over renu bhatia s statement nursing staff says don t defame us bring

रियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के खिलाफ हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में आज भी नर्सिंग स्टाफ

कुरुक्षेत्र (रणदीप रोड): हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के खिलाफ हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में आज भी नर्सिंग स्टाफ 2 घंटे की हड़ताल पर रहा। इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद रही। बता दे कि ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्स फेडरेशन ने सीएम नायब सैनी को लेटर भेजकर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया को पद से हटाने की मांग की है।

हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने पूरे प्रदेश में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक हड़ताल की कॉल ली है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में भी नर्सिंग स्टाफ 2 घंटे की हड़ताल पर रहा। स्टाफ नर्सों ने आरोप लगाया कि सारी कार्रवाई हमारे ऊपर डालने या किसी को बचाने के लिए की जा रही है। हमें नहीं पता कि डॉक्टर शैली को किसने नियुक्त किया था, लेकिन हम दिन-रात उस बच्ची को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आज तक उस व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया, जिसने इस आरोपी को छिपाने या बचाने का काम किया। हम चाहते हैं कि बच्ची को न्याय मिले। जिस डॉक्टर ने बच्ची का इलाज किया, उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। यदि डॉक्टर की ओर से कोई लापरवाही हुई है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। 

डॉक्टर शैली को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। हम सम्मान के साथ उस बच्ची को न्याय दिलाना चाहते हैं। उस व्यक्ति को भी सजा मिलनी चाहिए, जिसने इस डॉक्टर को अपॉइंट किया, जिस पर 2 बार रेप के आरोप लगे। उस बन्दे का नाम अभी सामने क्यों नहीं आया।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि 29 मई को एक 15 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया कि अस्पताल के एक डॉक्टर (डॉ. शैली) ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया अस्पताल पहुंचीं और मामले की जांच की।

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निरीक्षण के दौरान रेणु भाटिया ने ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और अधिकारियों से सवाल पूछते हुए कहा था कि:"अगर आपकी अपनी बेटी होती तो क्या आप उसे 15 मिनट तक किसी पुरुष डॉक्टर के पास अकेला छोड़ देतीं?"
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि:पीड़िता को अकेला क्यों छोड़ा गया?जब ओपीडी में नर्सिंग स्टाफ मौजूद था तो घटना कैसे हुई?आरोपी डॉक्टर की गतिविधियों पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया?डॉक्टर की नियुक्ति किस आधार पर की गई थी?

नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि रेणु भाटिया के बयान से ऐसा संदेश गया कि पूरी जिम्मेदारी नर्सों की थी। बिना जांच पूरी हुए पूरे नर्सिंग कैडर की कार्यशैली और निष्ठा पर सवाल उठाए गए। इससे नर्सों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंची है। नर्सों का दावा है कि वे पीड़िता को न्याय दिलाने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्हें "बलि का बकरा" नहीं बनाया जाना चाहिए।

 

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